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Friday, June 25, 2010

भाषा.....मेरी या तुम्हारी



"I must say...despite having born in Punjab...you have a tight command over HINDI....."
किसी ने यह शब्द मेरी तारीफ में कहे थे....उस का मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ । परन्तु यह पंक्तियाँ मुझे एक अलग से दृष्टिकोण की ओर  संकेत करती दिखाई देती हैं । यह सोच उस एक व्यक्ति की नहीं हैं , जिस ने यह शब्द कहे। कुछ इस तरह के ख्याल से मैं पहले भी टकरा चुकी हूँ । यह दृष्टिकोण कहाँ और क्यों उत्पन्न हुआ, पता नहीं ???

जी हाँ......आप ठीक समझे......भाषा के बारे में धारणा.....

वो भला मानस सोचता होगा कि उस ने तारीफ में दो शब्द क्या कह दिए.. इस ने तो बात का बतंगड़ बना डाला । वो अकेला ही नहीं .....शायद आप में से बहुत जन सोचने लगेंगे कि इस   ब्लॉग  पर टिप्पणी तो क्या.....हम तो पढ़ने भी नहीं जाएँगे ।  ख्याल है.....गलत भी हो सकता है.....

तो बात हो रही थी....भाषा के ज्ञान की....भाषा की समझ की.....

जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी तो मेरी हिन्दी की अध्यापिका ने मेरी हिन्दी सीखने की क्षमता को, मेरे परिवार से जोड़ कर देखा था । कुछ कहे और कुछ अनकहे शब्दों ने कुछ ऐसा संकेत दिया....' यह लड़की पंजाबी बोलने वाले जट्ट ( ज़िमींदार) परिवार से है....शायद हिन्दी में इतनी अच्छी न हो ।' ......और आज फिर ......उसी तरह का एक ख्याल.....

पंजाब में हिन्दी के ज्ञानी सोचते हैं कि पंजाबी बोलने वाले .....हिन्दी अच्छी तरह सीख नहीं पाएँगे ।

पंजाब से बाहर रहने वालों ने तो पूरे पंजाब को ही उस दायरे में रख कर देखा है ।
हिन्दी की अध्यापिका की दी चुनौती को स्वीकार करते हुए...... मैंने  छठी कक्षा से दसवीं तक.....दूसरे विषय के साथ - साथ हिन्दी में भी प्रथम रह कर .....उस अध्यापिका के दृष्टिकोण को तो बदल दिया था । तब बाल मन नहीं जानता था कि यह सब यहाँ तक ही सीमित नहीं है ।

साईंस विषय में पढ़ाई की , जिस के कारण मुझे विद्यार्थी जीवन में दसवीं कक्षा के उपरान्त हिन्दी या पंजाबी पढ़ने का समय नहीं मिला । अब यहाँ आस्ट्रेलिया आ करके..... मेरा साहित्य से ज़्यादा सम्बन्ध जुड़ा है ।
मैं यह नहीं कहती कि मुझे बहुत ज़्यादा आता है....मैं तो हर मोड़ पर.... हर समय ...कोई भी नई बात....किसी से भी....छोटा हो या बड़ा....सीखने को हमेशा तैयार  रहती हूँ।

मैं सभी भाषायों का सम्मान करती हूँ । 

बचपन में हमें तीन भाषाएँ सिखाई जाती थीं । 

पंजाबी .....राज्य भाषा

हिन्दी....... राष्ट्रीय भाषा

और अंग्रेज़ी....... अन्तर्राष्ट्रीय भाषा 

अंग्रेज़ी भाषा पेट की भूख मिटाने का साधन बनी ।

हिन्दी और पंजाबी भाषाएँ आत्मा की खुराक बनी । 

भाषाएँ ही परस्पर संवाद का सेतु बनती हैं ।

आप  को कोई भाषा कितनी आती है.....इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस भाषा का कितना प्रयोग करते हो .....आपकी क्या रुचि है.... कितना साहित्य पढ़ते हो.....लिखने का कितना अभ्यास करते हो....न कि आप कहाँ से हो या कहाँ पैदा हुए?

एक ख्याल है....
मानना ज़रूरी भी नहीं है......
हाँ....आप का क्या ख्याल है ?????
हरदीप संधु   

Wednesday, June 9, 2010

पहेलियाँ



आज से तीन- चार दशक पहले की बात करने जा रही हूँ , तब टी. वी. ने हमारी शाम को अपने आलिंग्न में नहीं लिया था । शाम होते ही बच्चे, दादी/ नानी से खाना खाते समय ही रात को सुनाई जाने वाली कहानी का वादा ले लेते । कभी - कभी तो एक ही कहानी दो-दो रात चलती रहती । कभी पहेलियाँ बुझाई जातीं ।


वो पहेलियाँ ....जब आज भी मैं याद करती हूँ....ऐसा लगता है ....हम बच्चे दादी के पास बैठे..... मैं बताऊँ...मैं बताऊँ... का शोर मचा रहे हों .... और दादी कहती हो....' अरे भई....जरा दम तो लो .....पहले पहेली कहने तो दो'

 आज  मैं अपनी यादों की पिटारी खोल..... कुछ पहेलियाँ ले कर आई हूँ     
आज बारी आप की है....'शब्दों का उजाला' के पाठकों की..... पहेलियों की शाम ....आप के नाम.....
( पाठकों की जानकारी के लिए बता रही हूँ .....यह पहेलियाँ मैने कोई आप की परीक्षा लेने के लिए नहीं लिखी.....यह तो अपने-आप को अपने बीते हुए कल से जोड़ने का प्रयास है.....आप ने भारत या किसी और देश में रहते यह अनुभव किया है या नहीं कि हम अपने-आप से दूर होते जा रहे हैं....अपने अतीत को भूलते जा रहे हैं...मगर मुझे यह लग रहा है....उसी कल से जुड़े रहने के प्रयास में यह पहेलियाँ ले कर आई हूँ...... )
जैसे-जैसे हम अपने कल को खोजते चले जाएँगे....पहेलियों के उत्तर मिलते जाएँगे....हम हर पहेली के साथ उत्तर लिखते जाएँगे..... 

1.   तीन अ‌क्षर का दे हूँ
     जानते लोग लाख करोड़
     पीठ काटो बन जाऊँ
     पाँच उँगली का जोड़  (पंजाब)
                         उत्तर दिया....बेचैन आत्मा ने)

2. वो चीज़ जो गीता में नहीं   ( झूठ)

                                                   उत्तर दिया ....हरदीप संधु ने)

3.  वो गई , ये आई  (नज़र) 
  उत्तर दिया..... हरदीप संधु  ने   
      दीनदयाल शर्मा ने बहुत ही अच्छा  उत्तर दिया ....
            बेटी गई,बहु आई' ...हो सकता है.

4.   आई थी, मगर देखी नहीं (मौत/ नींद)

                सही उत्तर दिया    दीनदयाल शर्मा और हरदीप संधु  ने      
                                खुशबू , याद हो सकती है

                                 उत्तर दिया.....  सीमा सचदेव      और  दीनदयाल शर्मा ने
(दीनदयाल शर्मा की ग्यारह वर्षीया बेटी मानसी ने बताया कि हवा ...हो सकती है)

5.   धूप में पैदा हुआ
      छाया मिली , मुरझा गया (पसीना)
              उत्तर दिया.....  दीनदयाल शर्मा ने


                   
6.   तीतर के दो आगे तीतर
     तीतर के दो पीछे तीतर
    बोलो कितने तीतर   (तीन)
                     उत्तर दिया ....मनोज भारती ने )     

 7.  वो चीज़ कौन सी
    जिसका है आकार
    मगर नहीं है भार  (अक्षर)
सही उत्तर दिया   ..... हरदीप संधु  ने     छाया  हो सकती है पर यहाँ कुछ और है    )
                            उत्तर दिया ....मनोज भारती ने )

8.  एक कटोरी में
   दो रंग का पानी   (अंडा)
            सही उत्तर दिया ...... हरदीप संधु  ने       आँख नहीं कुछ और सोचें
                                 उत्तर दिया ....सानू शुकल ने )

9. जिसने खरीदा 
   उस ने नहीं किया प्रयोग
   जिस ने किया प्रयोग
   उस देखा नहीं      (कफ़न)
                 उत्तर दिया .....  दीनदयाल शर्मा ने

10. मैं गोल-गोल
    मैं पीला-पीला
   दूसरे की थाली में
  मैं लगता बड़ा     (लड्डू)
               उत्तर दिया ....मनोज भारती ने )         

11. एक चीज़ है ऐसी
    देखे चोर....
   मगर चुरा न सके  (विद्या - ज्ञान) 
                                             उत्तर दिया..... राकेश कौशिक ).
12. हम माँ बेटी
    तुम माँ बेटी
   चलो बाग में चलें
  तीन आम तोड़ कर
   पूरा-पूरा खाएँ  (नानी, माँ और बेटी)
                उत्तर दिया ....मनोज भारती ने )
13 .सफेद धरती काले छोले
    हाथों बोएँ, मुँह से बोलें          
                             (कॉपी पर लिखे गये....' अक्षर')
उत्तर दिया ...   दीनदयाल शर्मा ने
14 . ऐसा बताओ कौन शैतान
     नाक पर बैठे पकड़े कान     ( ऐनक) 
                                 उत्तर दिया..... राकेश कौशिक और सीमा सचदेव ने).

15. स्थिर है मगर
     दिन रात चले (सड़क)
                              सही उत्तर दिया ...... हरदीप संधु  ने धरती नहीं है 
घड़ी हो सकती है,   दिल हो सकता है...    लेकिन कुछ और सोचें
            उत्तर दिया ....सानू शुकल,  दीनदयाल शर्मा   और राकेश कौशिक ने).

16. बिन हाथों के
     बिन पैरों के
    घूमें इधर- उधर  (अख़बार)
                         सही उत्तर दिया ...... हरदीप संधु  ने  
झाड़ू , नज़र हो सकती है पर यहाँ कुछ और है 
.                (दीवार घड़ी का पेंडुलम  नहीं है) 
            उत्तर दिया.....     दीनदयाल शर्मा  की  धर्मपत्नी कमलेश शर्मा   और   सीमा सचदेव ने).

17 . जैसे जैसे मुझे तलाशो
      दिल की अड़चन खोलो
     प्यार मेरे से पायोगे
     रुह की भूख मिटाओगे (किताब)
    ( ईश्रर हो सकता है,  ज्ञान हो सकता है...)
               उत्तर दिया.....  सीमा सचदेव    और  दीनदयाल शर्मा    ने)                           

18.   छोटा सा सिपाही
       उस की वरदी
      खींच कर उतारी  ( केला) 
                     उत्तर दिया.....  सीमा सचदेव और मनोज भारती ने).

19. एक चीज़ आई ऐसी
     सुबह चार टांगों पर
     दुपहर को दो पर
     शाम को तीन पर 
          (बचपन...जवां...और बुढ़ापा)
                          उत्तर दिया.....दीनदयाल शर्मा ने)
20. जिस के लगे
       उस को मारे
     है वो हत्यारा
     न वो फाँसी लगे
    न जाए जेल
    लगता सब को प्यारा  (चाकू)
               

     उत्तर दिया ....दीनदयाल शर्मा की ग्यारह वर्षीया बेटी मानसी ने



 ओम पुरोहित ' कागद' ने कुछ पहेलियों से ' पहेलियों की रात' को 

कुछ और रौचक बना दिया है.....
 आपका ब्लाग फिर देखने आया हूं।मन भरता ही नहीं ।
यहाँ पढ़ कर बचपन में नानी व माँ की सुनाई पहेलियाँ याद आ गईं। कुछ:-
21.      छोटी जी पिद्दणी,
          पिद्द पिद्द कर दी ।
          सारे बज़ार दी,
         लिद कट्ठी कर दी॥ ( झाड़ू )
                                    उत्तर दिया .... हरदीप संधु  ने 
22.       हरी सी
            भरी सी
            राजे दे
           दरबार विच्च
           दुपट्टा पा के
            खड़ी सी।   (मकई का भुट्टा)
                                   उत्तर दिया .... हरदीप संधु  ने
23.     आ से
          ओ से! (नज़र)
उत्तर दिया.....ओम पुरोहित 'कागद' ने
24 .   उत्ते मैँ हरी सी
        हेठ लाल हां
        अमीर ते गरीब
        सब दे नाळ हां।  (हरी मिर्च )
                                  उत्तर दिया .... हरदीप संधु  ने
25.   देखो मेरा कमाल
        लाओ तां हरी
      ल्हाओ तां लाल ।(मेहँदी)
          उत्तर दिया.....ओम पुरोहित 'कागद' ने
ओम पुरोहित ' कागद' जी कुछ और पहेलियाँ ले कर हाज़िर हुए.......
लो जी अज्ज फेर कुज्ज पहेलियां- 
26          वेखो मेरी तक़दीर।
             मेरे टिढ जन्मों
लकीर। 
                     (कणक का दाना)
                  .........उत्तर दिया......सुप्रीत ने
27.       बारां जुवाक
           ती पौते
           प्यो दा नां
          दस खोते ! 

            ( साल, महीना, दिन)
          ..........उत्तर दिया       हरदीप संधु
28.   पिच्छों खांवां
         अग्गों
कढां ।
29.    32 फौजी
        कल्ली नार
        कर दी वार
       नां मन्ने हार। 
           (जीभ और दाँत)
..........उत्तर दिया       हरदीप संधु
30.  दुम्म से
       पानी पी कर
      मुख से
      आग उगलती हूं!
 
31.  खड़ी भी चलती
     पड़ी भी चलती
    जड़ी भी चलती
     बंधी भी चलती
    बिन पग भी चलती।
 
32. पहले मैं खाता
      फिर
     सब को खिलाता!
 
33.  ऊगता हूं
      बढ़ता हूं
      पर
     लगता नहीँ पत्ता।
  
34. नाक पर बैठता
     कान पकड़ता। (ऐनक)
..........उत्तर दिया       सुमीत ने
35. गोभी मटर
    टमाटर प्याज
    सब संग यारी
    अपने जैसी
    कौन तरकारी?

हरदीप कौर संधु