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Monday, July 26, 2010

चाँद पर हो आशियाना


ज़मीन लगने लगी अब कम
चाँद पर बनाएँ आशियाना
लोगों ने उठाया यह कदम
भारतीय भी थे कहाँ कुछ कम
चलो धो लें हाथ बहती गंगा
जा लहराया चाँद पर तिरंगा
  हरदीप संधु  

Thursday, July 8, 2010

नन्हे हाथ



प्रभु हमारे क्यों पेट लगाया ?

हमें कैसे काम लगाया ?

कलम-किताब तो दूर की बातें 

नन्हे- नन्हे कोमल हाथों

हम रोज़ ईंट बनाएँ

अपना बचपन यूँ ही गवाएँ


हरदीप कौर संधु