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Monday, July 26, 2010

चाँद पर हो आशियाना


ज़मीन लगने लगी अब कम
चाँद पर बनाएँ आशियाना
लोगों ने उठाया यह कदम
भारतीय भी थे कहाँ कुछ कम
चलो धो लें हाथ बहती गंगा
जा लहराया चाँद पर तिरंगा
  हरदीप संधु  

30 comments:

kshama said...

Pahle chaand pe ek dhaba khol lena bahut zaroori hai...aashiyana phir banana!!

arvind said...

jab chand par tirnga lahara chuka hai to baki to ho hi jaayegaaa.

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Parul said...

waah..kya kalpnashkti hai..

डॉ टी एस दराल said...

सही कहा जी ।
भारतीय तो सब जगह पहुँच जाते हैं ।

दिगम्बर नासवा said...

अच्छी अभिव्यक्ति ... ये तो अच्छा ही है ..... भारतीयों के लिए तो गर्व की बात ही है ....

MUFLIS said...

जी हाँ
सच कहा आपने
भारतीय किसी से भी कम नहीं हैं
किसी भी तरह के 'संकल्प' में भी नहीं

अरुणेश मिश्र said...

उत्साह वर्धक ।

Deepak Shukla said...

Hi..

Bharat ke do khas avasron ko aapne ek main jod kar dihaya hai apne chitr main...

1. Chand par pahunchne ka chitr

2. Vijay divas..

donon hi Bharat ke eihaas ki mahatvpoorn uplabdhiyan hain...

aur aapki kavita to sone par suhaga..

Deepak

singhsdm said...

मन की उड़ान को नए रंग और नया जहाँ बख्शने की सफल कवायद है यह छोटी सी कविता....!

डा. अरुणा कपूर. said...

वाह!...क्या खूब कही आपने!... अब चांद हमारा है!

Razi Shahab said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

anjana said...

अच्छी अभिव्यक्ति

सुमित प्रताप सिंह said...

रहा तिरंगा ऊंचा हमारा...

Tripat "Prerna" said...

gud one and nice thinking :)

http://liberalflorence.blogspot.com/

Shayar Ashok said...

वाह!!! बहुत खूब !!

विनोद कुमार पांडेय said...

हरदीप जी...भारतीयों को पहल करने में दिक्कत होती है किसी ने पहल कर दी तो बस आगे उसको फॉलो करना बहुत अच्छे से आता है..बढ़िया प्रस्तुति..शुभकामनाएँ

डॉ. हरदीप सँधू said...

सभी दोस्तों का धन्यवाद ....
जो चाँद पर लहराते तिरंगे की जय-जय में शामिल हुए।
जी हाँ, अब चाँद हमारा है....
अब हमारी फिल्मों के गानों में भी कुछ बदलाव आएगा....
'चलो दिलदार चलें....
चाँद के पार चलें...' कहने की आवश्यकता नहीं होगी....
'चलो दिलदार चलें ..चाँद के द्वार चलें...' कहना ठीक रहेगा...।
और हाँ.....पाठकों की डिमांड पर ....
अब चाँद पर ढाबा भी खुलने ही वाला है....
खाना खाने जरूर आईएगा ...परिवार या दोस्तों के संग !!!!!

boletobindas said...

भई जब तक मेड इन इंडिया या मेरा भारत महान कहने का मौका नहीं ढ़ूढ लेते हैं हम, जैन कहां मिलता हैं हम।

boletobindas said...

भाषा पर आपके विचार पढ़े। मुझे तो काफी हंसी आती है जब कोई ऐसी बात करता है। ऐसे लोगो की कमी नहीं है। पंजाबी चैनल में एक साल तक काम करने के दौरान सिर्फ औऱ सिर्फ हिंदी औऱ उसकी अनेक बोलियों से परिचित होने के कारण बडे आऱाम से काम किया। हालांकि दिल्ली का होने के कारण पंजाबी अनजान नहीं थे मेरे लिए। पर बेहतर पंजाबियों के बीच जाने पर उन्हें आश्रचर्य होता था कितनी जल्दी मैं पंजाबी पर पकड़ बना रहा हूं। जबकि उनको समझाना आसान नहीं होता था मेरे लिए कि भई हिंदी की अनेक बोली से थोड़ा बहुत परिचित होने के कारण या उस तरह से समझने के कारण पंजाबी मेरे लिए अनजान नहीं है सुगम है। हां भ शब्द का उच्चारण करने में मैं आज तक सफल नहीं हुआ हूं।

संजय भास्कर said...

अच्छी लगी आपकी कवितायें - सुंदर, सटीक और सधी हुई।

सहज साहित्य said...

कल्पना को लगे पंख
बना चाँद पर आशियाना
कुछ पल के लिए मन को
मिल ही गया ठिकाना ।
-बहुत सुकून दे गया आपके शब्दों का उजाला ।

बेचैन आत्मा said...

सोचता हूँ यही बात अगर हाइकू में कहनी होती तो आप क्या कहतीं....

धरती कम
चाँद पर हो घर
उठा कदम.

आशीष/ ASHISH said...

हम भी चलेंगे....
हाँ नी तो!
जय हिंद!

psingh said...

bahut hi sundra prastuti
abhar

Anonymous said...

achcha hai ......

Virendra Singh Chauhan said...

Ye bhi bahut badiya hai.

Chaand par Tiranga..Dekhker bahut achha lag rah hai.

Virendra Singh Chauhan said...

Ye bhi bahut badiya hai.

Chaand par Tiranga..Dekhker bahut achha lag rah hai.

दीनदयाल शर्मा said...

Jai ho...

Udan Tashtari said...

जय हिन्द!! सटीक!