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Saturday, August 28, 2010

ओ कलम के धनी !


कलम से ज्यादा

ताकत नहीं रखती तलवार

लेकिन कलम की भी

होती है तेज़ धार

लिखती है कलम तेरी

रोज़ बड़ी-बड़ी बातें

भूल जाती है वो

हँसी देने वाली

छोटी-छोटी सी बातें

करती है कलम तेरी

किसी लड़की संग

हुए प्रेम की चर्चा

या उस से बिछुड़ने के बाद

दर्द-आँसुओं को देती

तेरी कलम ऊँचा दर्जा

तेरी कलम ने बना दिया

'लड़की' को कोई

'उपभोग' की वस्तु

उसी से शुरू कर

उसी पर पूरा करता

अपना हर गीत तू

अपवित्रता शब्दों में नहीं

तेरी सोच में है....

अच्छा बनता है तू

लेकिन बुराई दिल में है

ओ कलम के धनी.....

अपने शब्दों से बुन

कोई ऐसा जाल

पढ़कर हो जाए

हर कोई निहाल !!!


हरदीप संधु

Tuesday, August 24, 2010

रक्षाबन्धन
















भाई हाथ बंधी
बहनों की...
सांस की डोरी
चोट भाई को लगे

बहिना रो ली...
जब कभी भी
भाई होत उदास

बहिना की रुक जाती सांस
ठंडी हवा का झोंका
जब माय
के  से आए...
तभी तो ब
हिना
चैन से जी पाए !!!! 
हरदीप कौर संधु

Friday, August 20, 2010

आटे की चिड़िया



रोए जो मुन्नी


आटे की चिड़िया से


माँ पुचकारे

चिड़िया जब मिली

मुन्नी के चिहरे

मुस्कान खिली

आँखें हैं भरी

अभी भी लबा-लब

हँसी भी छूटी

कोमल लबों पर

पकड़ कर चिड़िया

बोली नन्ही गुड़िया

'' माँ...ओ...माँ...

ये तैसी है...

चिरिया छोती सी

न उदती है...

न करती चीं-चीं...

खाकर नोती

और.....दाने

पीकर दुधू

और....पानी

बदी हो जाएगी

चिरिया नानी

बदी होतर

फुर्र...र हो जाएगी

फिर तिसी के

हाथ न आएगी

जब मैं बुलाऊँ

उदती आएदी

मीथे-मीथे...

गीत सुनाएगी

चीं-चीं कर....

मुझे जगाएगी

दादी की कहानी वाली

चिरिया बन जाएगी!!''
हरदीप कौर संधु 

Thursday, August 5, 2010

चाँद पर ढाबा


नील आर्मस्ट्रॉन्ग था एक महान विज्ञानी

दुनिया को कुछ अलग सा कर दिखाने की उस ने ठानी

करके प्रयत्न जब वह चाँद पर पहुँचा

रखते पहला कदम वह रह गया भौंचका

दूर से देखा लगा किसी आदमी का साया

पास गया तो साथ में एक ढाबा भी पाया

पंजाबी अन्दाज़ में विज्ञानी का हुआ स्वागत

स्वागत करने वाला था 'पंजाबी ढाबे' का मालिक

'' बादशाहो....ऐध्धर किध्धर ????

की लँऔंगे....?????

दाल मख्खणी

सरों दा साग

मक्की दी रोटी या

चाटी - लस्सी''

पंजाब के बारे में विज्ञानी ने सुन रखा था

लेकिन पंजाबी खाने को आज तक नहीं चखा था

सुन कर विज्ञानी की भूख और चमकी

खाते-खाते  उसने अपनी शंका भी प्रकट की

'' मैने तो सोचा था....

मैं ही हूँ .....जिसने चाँद पर पहला कदम रखा है

मगर आप ने तो यहाँ अच्छा-खासा ढाबा खोल रखा है ''

'' ओ जी की करदे मालको......

जाणा सी अमरीका.....

पता नहीं इडीयन जैट ने कहाँ ला कर फैंका ???

सोचा कोई बात नहीं...डरने की बात नहीं

हमने तो जहाँ जाणा है....

कुछ कमाल कर दिखाणा है....

अमरीका में तो और भी बहुत हैं पंजाबी

अच्छी जगह देख कर......

यहाँ पंजाबी ढाबा खोलने की सोची

अभी तो कोई-कोई ही आता है यहाँ

भविष्य में लोगों का लग जाना है ताँता

चलो अब तुम आ गए हो......

मिल कर ढाबा चलाएँगे

यहाँ पैर जमा कर....

फिर चैन से......

अमरीका की सैर करने जाएँगे !''

हरदीप संधु