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Thursday, August 5, 2010

चाँद पर ढाबा


नील आर्मस्ट्रॉन्ग था एक महान विज्ञानी

दुनिया को कुछ अलग सा कर दिखाने की उस ने ठानी

करके प्रयत्न जब वह चाँद पर पहुँचा

रखते पहला कदम वह रह गया भौंचका

दूर से देखा लगा किसी आदमी का साया

पास गया तो साथ में एक ढाबा भी पाया

पंजाबी अन्दाज़ में विज्ञानी का हुआ स्वागत

स्वागत करने वाला था 'पंजाबी ढाबे' का मालिक

'' बादशाहो....ऐध्धर किध्धर ????

की लँऔंगे....?????

दाल मख्खणी

सरों दा साग

मक्की दी रोटी या

चाटी - लस्सी''

पंजाब के बारे में विज्ञानी ने सुन रखा था

लेकिन पंजाबी खाने को आज तक नहीं चखा था

सुन कर विज्ञानी की भूख और चमकी

खाते-खाते  उसने अपनी शंका भी प्रकट की

'' मैने तो सोचा था....

मैं ही हूँ .....जिसने चाँद पर पहला कदम रखा है

मगर आप ने तो यहाँ अच्छा-खासा ढाबा खोल रखा है ''

'' ओ जी की करदे मालको......

जाणा सी अमरीका.....

पता नहीं इडीयन जैट ने कहाँ ला कर फैंका ???

सोचा कोई बात नहीं...डरने की बात नहीं

हमने तो जहाँ जाणा है....

कुछ कमाल कर दिखाणा है....

अमरीका में तो और भी बहुत हैं पंजाबी

अच्छी जगह देख कर......

यहाँ पंजाबी ढाबा खोलने की सोची

अभी तो कोई-कोई ही आता है यहाँ

भविष्य में लोगों का लग जाना है ताँता

चलो अब तुम आ गए हो......

मिल कर ढाबा चलाएँगे

यहाँ पैर जमा कर....

फिर चैन से......

अमरीका की सैर करने जाएँगे !''

हरदीप संधु

25 comments:

Deepak Shukla said...

डॉक्टर साहिबा....

लोग कहते हैं अगर स्वप्न देखने हैं तो बड़े देखो....अगर उसमे से कुछ थोड़े भी सच होते हैं तो भी आपके हिस्से बहुत बड़ा हिस्सा आ जायेगा.... सो चाँद पर ढाबे की कल्पना चाहे स्वप्न ही हो पर आज नहीं तो कल ये सच अवश्य होगा...

आज से चाँद बरस पहले तक क्या किसी ने सोचा था की चाँद जो हमारी पौराणिक कथाओं में था उस चाँद पर भी लोग पहुँच जायेंगे या वहां बसने की कल्पना भी करेंगे पर अगर ये सच हुआ है तो वो भी सच होगा....

हालांकि इस पोस्ट का पूर्वाभास आपने अपनी पिछली पोस्ट की टिपण्णी में दे दिया था...पर स्वप्न इस रूप में आकर लेगा इसका अंदाजा न था...
ईश्वर करे आपका स्वप्न हमारे जीवन में ही सच हो जाए....

दीपक....

डॉ टी एस दराल said...

वाह जी वाह ! चाँद पर ढाबा ।
इसीलिए कहते हैं आलू और पंजाबी , संसार में सब जगह मिल जाते हैं ।
अच्छी हास्य रचना ।

ललित शर्मा said...

वाह जी
चाँद ते वी ढाब्बा खुल ग्या।
साड्डे जाण तौं पहलां ही।

आशीष/ ASHISH said...

जनवरी 2010 से पंजाब में हूँ......... "बाहर" जाने का बड़ा ही क्रेज़ है!
अमरीका, कनाडा, आपका आस्ट्रेलिया......
और अब चाँद!!!!!!!
दो चीज़े दुनिए दे हर कोनेच मिलेंगी... एक ते आलू, ते दूजा पंजाबी!!!
इद्दा ही है न?

Parul said...

accha vyang hai :)

सहज साहित्य said...

क्या कहने जी आपके पंजाबी ढाबे के ? दिल खुश हो गया आपकी हल्की-फुल्की कविता पढ़कर । बहुत -बहुत बधाई , चाँद पर धाबा खोलने की सफलता जो मिल गई ।

हास्यफुहार said...

वाह जी वाह!

Vijay Pratap Singh Rajput said...

अच्छी हास्य रचना ।

Tripat "Prerna" said...

gud 1

http://sparkledaroma.blogspot.com/

मो सम कौन ? said...

बोत वदिया जी, चांद ते पहुंच गये पर अमरीका दा इरादा नहीं छडना।

मजेदार।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...
This comment has been removed by the author.
संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया ....जहाँ भी पंजाबी पहुँच जाएँ वहाँ की तो बल्ले बल्ले ....

Manoj Bharti said...

सुंदर व्यंग्यात्मक काव्य !

gaurtalab said...

bahut sunadar....

JHAROKHA said...

bahut khoob hardeep ji;
bahut hi aanand aaya padh kar .vaise bhi mujhe panjaabi ,urdu ye sab bhashhaye bahut hi achhi lagti hain.blog jagat ke jariye bhshhaon ka bhi gyan badh raha hai.bahut hi achhi prastuti.
poonam

Shri"helping nature" said...

hrdip ji sat sri akal
shaaandar rachna
logon ko hasana bahut muskil hota hai aapki rachna ne so kr dikhaya
bahut khub aapki rachna mujhe bahut pasand aayi

mridula pradhan said...

bahut achchi lagi.

ओम पुरोहित'कागद' said...

डाक्टर साहिबा।
सत श्री अकाल !
आप जी ने पंजाबियां दे हुनर,हौँद अते विरसे ते बोत सौणां लिख्या।पंजाबी बंदा जित्थे वी जांदा-वसदा है उत्थे अपणी मेहनत राही वखरी पिछाण बणा लेँदा है चन्न की वड्डी चीज है!
पारुल जी ऐ व्यंग्य नी हक़ीकत है।
आप जी दे हाइकू किँवे चल रहे ने ?

Virendra Singh Chauhan said...

Bahut hi badiya....Hardeep ji bahut achha Idea.... AApke Blog par aaker bahut achha lagaa.

Kuchh alag padhne ko mila.

Babli said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो प्रशंग्सनीय है! उम्दा पोस्ट!

'अदा' said...

waah ji waah,,
bahut badhiyaa..
ye iadea to vaise bhi kisi ko nahi aaya hoga...chaand par dhaaba..
ha ha ha

Udan Tashtari said...

ये हुई न असल पंजाबी वाली गल...चाँद पर ढाबा!! हा हा!! बहुत मजेदार परिकल्पना...कौन जाने, एक दिन सच ही निकले. :)

दिगम्बर नासवा said...

वाह जी ... चाँद पर ढाबा वो भी पंजाबी ढाबा ... हमारे दुबई में कहते हैं मालबारी की चाय मिलती है चाँद पर उसे ...

Anand Rathore said...

मज़ा आ गया , तुसी बड़े मजाकिया हो... बहुत अच्चा...

Bhushan said...

पंजाबी ढाबा देख कर अच्छा लगा. मैं तो उम्मीद करता था कि राकेट के वहाँ उतरने से पहले 'Singh Rocket Repairs and Spares' की दूकान भी खुली होगी.