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Friday, August 20, 2010

आटे की चिड़िया



रोए जो मुन्नी


आटे की चिड़िया से


माँ पुचकारे

चिड़िया जब मिली

मुन्नी के चिहरे

मुस्कान खिली

आँखें हैं भरी

अभी भी लबा-लब

हँसी भी छूटी

कोमल लबों पर

पकड़ कर चिड़िया

बोली नन्ही गुड़िया

'' माँ...ओ...माँ...

ये तैसी है...

चिरिया छोती सी

न उदती है...

न करती चीं-चीं...

खाकर नोती

और.....दाने

पीकर दुधू

और....पानी

बदी हो जाएगी

चिरिया नानी

बदी होतर

फुर्र...र हो जाएगी

फिर तिसी के

हाथ न आएगी

जब मैं बुलाऊँ

उदती आएदी

मीथे-मीथे...

गीत सुनाएगी

चीं-चीं कर....

मुझे जगाएगी

दादी की कहानी वाली

चिरिया बन जाएगी!!''
हरदीप कौर संधु 

14 comments:

अन्तर सोहिल said...

बहुत सुन्दर और प्यारी कविता
हमें पढवाने के लिये हार्दिक आभार
हम भी आटे की गुडिया बनाते थे और आज हमारे बच्चें भी ऐसा ही करते हैं।

प्रणाम स्वीकार करें

डॉ टी एस दराल said...

आटे की चिड़िया --क्या बात है ।
बहुत सुन्दर रचना ।

Deepak Shukla said...

Hi..

Padhkar yaad hamen bhi aaye..
bachpan ke meethe ahsaas...
Aate ki wo chhoti chidiya..
Maa ke saath ke wo pal khas..

Sundar kavita...

Deepak...

सहज साहित्य said...

आपने आटे की चिड़िया को सचमुच की चिड़िया बना दिया , घर में फुदकती तुतलाती चिड़िया । आपकी गहन संवेदना प्रणम्य है हरदीप जी ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी इस रचना ने याद दिला दी जब माँ खाना बनातीं थीं और हम तंग करते थे तो आता दे कर बैठा देती थीं ...चिड़िया बनाओ ...

बहुत अच्छी रचना ..

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी कविता।

बेचैन आत्मा said...

प्यारी कविता.
हाईकू से आगे की अभिव्यक्ति.

दीनदयाल शर्मा said...

कितनी मासूम और संजीदा है...आटे की चिड़िया...बहुत बहुत बधाई..

Prem Farrukhabadi said...

बहुत प्यारी प्यारी कोमल भावों की रचना। बधाई!!

भूतनाथ said...

waah.....tyaa baat hai.......

मनोज भारती said...

आज आपने फिर मेरे बचपन को याद करवा दिया ...जब माँ चुल्हे पर रोटिया सेंकती थी और मुझे कुछ आटा दे देती थी...ऐसी ही चिडिया या जलेबी बनाने के लिए । धन्यवाद !!!

राकेश कौशिक said...

बहुत बहुत सुंदर - बचपन से रूबरू करा देती हैं आपकी ये रचनाएँ - पहले भी पढ़ चुका हूँ "चिड़िया - कबूतर पकड़ना" उसने भी बचपन से साक्षात्कार कराया था - आभार

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

सुन्दर रचना ,बाल साहित्य से संबंधित अति उत्तम रचना। ऐसी रचनायें बहुत कम लोग लिख पाते हैं। बच्चों के पाठ्यक्रमों में ऐसी ही रचनाओं की ज़रूरत है। बहुत बहुत मुबारक बाद।

Veerbala said...

हरदीप जी आटे की चिड़िया तो युगों -युगों तक बनती रहेगी । दुनिया के बाकी खिलौने पुराने पड़ जाएँगे, पर आटे की चिड़िया सदा उड़ान भरती रहेगी । परदेस में इस चिड़िया को पकड़े रहना । फुर्र से उड़ने मत देना । वीरबाला