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Wednesday, October 13, 2010

शहर से लौटा खुशिया चाचा




















छोटापुर भाव समालपुर वाले खुशिया चाचा को तो आप जानते ही हैं। अब वह शहर की नौकरी छोड़कर गाँव में रहने लगा। किसी ने पूछा तो चाचा ने अपने शायराना अन्दाज़ में जो रंग बाँधा ....उसी का सीधा प्रसारन आपको सुनवाते हैं ....याद है न खुसिया चाचा ' छ/श' को ' स' बोलता है....

मन भर गया सहर से

अब गाँव में ही रहूँगा

सोटापुर को तो कब का

बना दिया मैने समालपुर

अब गाँव में भी

सहरी इस्टाईल से रहूँगा...

हिन्दी तो नेस्नल 

यानि रास्ट्र भासा (राष्ट्रभाषा)

यह तो नहीं सोडूँगा

लेकिन ........

थोड़ी इंगलिस भी  बोलूँगा ....

काला चस्मा(चश्मा ) लगाएगा 

तेरा खुसिया चाचा

मसली(मछली) को फिस्स  कहेगा

चाय में सक्कर (शक्कर) नहीं

अब सूगर डालकर पीएगा

सिक्सा (शिक्षा) को कुयालिफकेसन

छुट्टी  को वकेसन कहेगा 

गाँव के हर काम में होगा

अब चाचा सामिल(शामिल) ...

न..न..पार्टीसिपेसन

किसी का न होने देगा 

सोसन (शोषण)..उफ़..एक्सपलॉएटेसन

बूढ़ा होने लगा तो क्या हुआ

दिखता तो अभी भी मैं फ़ैसनेबल

नहीं समझे क्या .....सैल-सबीला

शिवजी को कहूँगा- लॉरड सिवा

लेकर आ गया हूँ मैं पैनसन (पैन्शन)

निभाऊँगा सारे रिस्ते (रिश्ते)

हाँ..हाँ..रिलेसन

तभी तो कहलाऊँगा 

भारतीय क्रिएसन !!!

हरदीप संधु 

14 comments:

सहज साहित्य said...

खुसिया चाचा के ईस्टाईल ने बहुत खुश कित्ता । दिनभर की उदासी धुल गई । मन की थकान कहीं रुल गई । रामेसर भैया

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मजेदार ...:):)

Udan Tashtari said...

हा हा!! वाह रे भारतीय क्रिएसन !!...मजेदार रहा.

Bhushan said...

रमेसर भैया के साथ साथ भर्त भूसन को भी अच्छी लगी 'स' की बोली.

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

साहित्यकार-6
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

निर्मला कपिला said...

हरदीप जी कुछ दिन खुशिया चाचा को हमारे शहर भी भेज दें। अच्छी प्रस्तुति। बधाई।

ali said...

उनसे कहिये खुश रहिये बस !

बूझो तो जानें said...

बहुत सुन्दर कविता........ शुभकामनाएं.

विजय तिवारी " किसलय " said...

कई तरह का समावेश है आपकी चाटनुमा अभिव्यक्ति में.
मनोरंजक.
- विजय तिवारी ' किसलय' हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर

विजय तिवारी " किसलय " said...

कई तरह का समावेश है आपकी चाटनुमा अभिव्यक्ति में.
मनोरंजक.
- विजय तिवारी ' किसलय' हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर

Parul said...

too gud hardeep :)

Apanatva said...

shaandar vyktitv ke darshan ho gaye..........
:)

abhishek1502 said...

मज़ा आ गया ,
ऐसे ही और कविताओ का इन्तजार रहेगा