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Thursday, November 25, 2010

कुछ तो करना होगा ..........














शाम हुई   रात गई काली
कब का मिट गया था अँधेरा
रिश्वतखोरी के बादलों ने
 होने दिया था नहीं सवेरा.........
करता रहा तेरे शहर को
अपना बनाने की  मैं कोशिश
झूठ- फ़रेब की  गर्म हवा ने
होने नहीं दिया  वह मेरा.......
आशाओं का नन्हा पौधा
रोपा  था मन के आँगन में
भ्रष्टाचार के  दूषित जल ने
चारों तरफ़ जमाया डेरा …
नन्हीं  ख़्वाहिशों के पाखी तो
कब के आकरके  बैठे थे
हेरा-फेरी व कपट-जाल ने
कहीं ना होने  दिया बसेरा.........
हमारी सब भोले-भालों की
कुराहे डाली भरी  जवानी
आज के  इन  सब रहबरों  ने
धुँधला कर दिया चार-चुफेरा............
सभी   तैरते   लहरों के संग
कि  वे बदल  डालेंगे  जग को
अब  चीरकर इन लहरों को
हम तोड़ेंगे  इनका घेरा …


हरदीप कौर सन्धु ( बरनाला)

Saturday, November 20, 2010

श्री गुरू नानक देव जी का प्रकाश पर्व


               धन गुरु नानक प्रगटिया
          मिटी धुंध जग चानण होआ  !!
 श्री गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल  1469 ई.   ( वैशाख   सुदी ३, संवत् 1526  विक्रमी ) में तलवंडी रायभोय नामक स्थान ( जो  पाकिस्तान में है) हुआ । आजकल यह स्थान ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है ।
गुरु जी का प्रकाश उत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है जिसके कई कारण हैं .......
1. महाराजा रणजीत के समय में यह पर्व वैशाख ( अप्रैल ) में ही मनाया जाता था ननकाना साहिब में ।

2. भाई साहिब भाई  संतोख सिंह ने भाई बाला जी की साखियों के आधार पर 1823 ई. में ' नानक प्रकाश' लिखा जिसमें बाबा नानक का  जन्म कार्तिक में ही बताया गया है।

3. इसके बाद 1853 ई. को पहली बार यह गुरुपर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया गया ।

4. यह भी माना जाता है कि एक बार जब बाबा नानक वेंई नदी में स्नान करने गए और वहाँ से तीन दिन बाद बाहर आए । उस दिन कार्तिक की पूर्णिमा थी । बाहर आकर गुरु जी ने एक नया संदेश दिया....रब एक है.....न कोई हिन्दू  है .....न कोई मुसलमा है । लोग इस दिन को बाबा नानक का रूहानी जन्म मानते हैं ।

5. कार्तिक माह को हिन्दू  लोग श्री राम तीर्थ मेले पर अमृतसर जाते थे । ज्ञानी संत सिंह चाहते थे कि सिख भी इन दिनों दरबार साहिब आएँ माथा टेकने ।

6. वैशाख माह में तो और भी बहुत सारे उत्सव होते हैं , जैसे वैसाखी , होली, होला मुहल्ला , दुर्गा- अष्टमी , रामनवमी ।  

 7. कार्तिक माह में किसान लोगों  के पास  हाड़ी ( रबी) की फसल काट लेने के बाद समय ही समय होता है । 

यह सब कारण मिल करके बन गए कारण यह गुरुपर्व नवंबर ( कार्तिक ) माह में मनाने का ।
हरदीप कौर सन्धु ( बरनाला)


Sunday, November 14, 2010

बाल दिवस



















बात उन दिनों की है जब खुशिया चाचा स्कूल में पढ़ता था। उस के  स्कूल में एक शिक्षा- इन्स्पेक्टर  आया । वह बच्चों की  पढ़ाई का स्तर जानने के लिए स्कूल की सबसे होशियार मानी जाने वाली कक्षा ( खुशिया चाचा की कक्षा) में बच्चों से सवाल पूछने लगा ।
उसने बोर्ड पर एक अंग्रेज़ी का शब्द Nature  लिख दिया । बच्चों को शब्द पढ़ने के लिए कहा । बच्चे बोले, '' लो सर यह भी कोई मुश्किल सवाल है.....आपने तो 'नटुरे ' लिखा है । आपको माने तो तब अगर आप खुशिये के सवाल का उत्तर बता दें ।''
खुशी राम ने सुना तो  खुशी के मारे फूलकर कुप्पा हो गया । वह  अकड़कर खड़ा हो गया और बोला,  ''सर क्या आप बता सकते हैं  कि बकरी घास तो लम्बी- लम्बी खाती है....फिर वह मींगने गोल-गोल क्यों करती है ?''
इतना सुनते ही सारी क्लास  खिल-खिलाकर हंसने लगी ।
इन्स्पेक्टर  साहिब  तो  nature का pronunciation 'नटुरे  ' सुन कर पहले से ही लाल-पीले हो रहे थे और अब खुशिये के सवाल और बच्चों की हंसी से और भी भड़क गये और सीधे हैड मास्टर के आफ़िस में  पहुंच कर बोले - ये बच्चों को आप लोग क्या सिखाते  हो ? एक तो  Nature का  उच्चारण नटुरे करते हैं और ऊपर से बतमीज़ी  से उल्टे-सीधे सवाल मुझसे पूछते हैं। मैं तुम्हारी स्कूल की ऐसी खराब रिपोर्ट  बनाऊंगा कि  तुम्हारे स्कूल की मान्यता ही खत्म करवा दुंगा !
 हाथ जोड़कर हैड मास्टर बोला, ''  इन्स्पेक्टर  साहब ऐसा जुल्म मत करना ,  वर्ना हमारे  स्कूल के छात्रों का तो फ़टुरे ही (future) खराब हो जायेगा !

 हरदीप संधु ( बरनाला) 

Monday, November 8, 2010

पंजाब रोडवेज़ .....


1.    बिना टिकट सवारी
       ऊपर हाथ पकड़ो 
       जाने की 'गर जल्दी
2.    रोडवेज़ दी लारी
      'पास वालों' की
       आती बाद में वारी
3.    पी. आर. टी. सी. - पिटदी रोंदी तुरदी चल.....

 4. चलती बस से सिर व बाजू बाहर निकालना मना है....

     तोरी जैसे लटकना मना नहीं है !!

 5 . बस में बैठे कवि से कंडक्टर ने पूछा.....

     टिकट कहाँ की दूँ ? कहाँ जाना है ?

    कवि बोला.....दूर आसमान में ठिकाना है.....

    कहीं की भी देदो टिकट ....

   मैने तो बादलों के उस पार जाना है  !!!


हरदीप कौर संधु ( बरनाला )

Thursday, November 4, 2010

शुभ दीवाली



 आपको दीवाली की मिलियन- ट्रलियन बधाई हो !
यह दीवाली आपकी जिन्दगी में.......
25 रुपये वाली हवाई जैसे सीटीयाँ बजाए.........
50 रुपये वाले अनार जैसे रोशनी करे.......
साथ-साथ 75 पैसे वाली फुलझड़ी जैसे शुर-शुर भी करे.........
आपके सारे दु:ख 50 पैसे वाले लाल पटाखे की तरह फुस हो जाएँ..........
और आप 30 रुपये वाली चक्करी चलाते उछल-उछल कर खुशियाँ मनाएँ ...
दीवाली की ढेरों शुभ- कामनाएँ !!!!

हरदीप कौर संधु