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Thursday, December 2, 2010

विज्ञापन की दुनिया के वार्षिकांक में कविताएँ

10 comments:

निर्मला कपिला said...

डा.भावना कुंवर जी और डा. हरदीप कौर सन्धू जी को बहुत बहुत बधाई। पत्रिका के बारे मे और भी विस्तार से बताते तो बहुत अच्छा था, मंगवा भी सकते थे। हो सके तो जानकारी दीजियेगा। धन्यवाद।

डॉ टी एस दराल said...

हरदीप संधू को बहुत बधाई ।
बहुत प्रसन्नता हुई जानकर ।

Bhushan said...

हरदीप जी और भावना जी को बहुत बधाई.

kunwarji's said...

डॉ. भावना कुंवर जी,और आपको हार्दिक बधाई जी!

कुंवर जी,

अरविन्द जांगिड said...

ਤ੍ਵਾਦਾ ਸ਼ੁਕ੍ਰਿਯਾ ਜੀ.

ਤ੍ਵਾਦੇ ਆਪਣੇ ਬਲੋਗ ਤੇ ਤ੍ਵਾਦਾ ਸਵਾਗਤ ਹੈ ਜੀ.
http://arvindjangid.blogspot.com/

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

डा. हरदीप संधू और भावना जी को ढेरों बधाइयाँ!
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

shekhar suman said...

मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

ज़मीर said...

हरदीप संधु जी आपको बहुत बहुत बधाई.

डॉ. हरदीप संधु said...

कहते हैं कि गुरू बिना गति नहीं...
रामेश्वर जी मेरे गुरू हैं,उन जैसा गुरू आज की दुनिया में मिलना बहुत मुश्किल है ।
इन कवितायों का 'विज्ञापन की दुनिया' में प्रकाशित होना ....रामेश्वर जी द्वारा दिए उत्साह व सही दिशा की वजह से है ।
इस के लिए बधाई के असली पात्र वो हैं मैं नहीं ।

Dr.Bhawna said...

aap sabhi ka bahut bahut aabhar...