Followers- From 17 May 2010.....'til today

Thursday, December 16, 2010

मुक्तक













[1]
ना चुप मेरी कायरता है
ना चुप मेरी महानता है
माना लब हिलना बन्द हुए
दिल तो बहुत कुछ बोलता है !
[2]
फूलों ने  काँटे  जाने होंगे
खुशियों  ने गम पहचाने  होंगे
फूलों से खुशी चुन कुछ न होगा
गम -काँटे भी अपनाने होंगे  !
[3]
दर्द भुलाकर जीना सीख
गुस्से को तू पीना सीख
बहुत हसीन मिली ज़िन्दगी
फटे दिलों को सीना सीख !
[4]
समय से पहले कुछ नहीं मिलता
भाग्य से ज़्यादा कुछ नहीं मिलता
कभी नहीं बिकता प्रेम हाट में
सिर्फ़ सज़दों से  रब नहीं मिलता !
हरदीप कौर सन्धु ( बरनाला)

17 comments:

Udan Tashtari said...

समय से पहले कुछ नहीं मिलता
भाग्य से ज़्यादा कुछ नहीं मिलता
कभी नहीं बिकता प्रेम हाट में
सिर्फ़ सज़दों से रब नहीं मिलता !

-बहुत उम्दा!

सहज साहित्य said...

हरदीप जी आपने सही कहा है -बहुत हसीन मिली ज़िन्दगी
फटे दिलों को सीना सीख ! दूसरों के दुखों को दूर करना ही सच्ची मानवता है ।

यशवन्त said...

बिलकुल सही बात को मुक्तक के ज़रिये बी खूबी कहा है आपने.

सादर

कविता रावत said...

समय से पहले कुछ नहीं मिलता
भाग्य से ज़्यादा कुछ नहीं मिलता
कभी नहीं बिकता प्रेम हाट में
सिर्फ़ सज़दों से रब नहीं मिलता !
.... ....यही समझ ले इंसान तो रोना फिर काहे का ....
बहुत अच्छी सच्ची बातें .....धन्यवाद

अरविन्द जांगिड said...

ਜੀ ਆਯਾ ਨੂ ਮੈਡਮ ਨੂ, ਸਾਸਰੀਯਾਕਾਲ ਆਖਦਾ ਹਾ,

सार्थक सन्देश देती सुन्दर रचना, आपका साधुवाद.

"गांधी जी बहार निकल आये" पर आपकी अमूल्य टिपण्णी पाकर खुशी होगी.

Bhushan said...

दर्द भुलाकर जीना सीख
गुस्से को तू पीना सीख
बहुत हसीन मिली ज़िन्दगी
फटे दिलों को सीना सीख !

बहुत अच्छी पोस्ट के लिए आभार.

ज़मीर said...

समय से पहले कुछ नहीं मिलता
भाग्य से ज़्यादा कुछ नहीं मिलता
कभी नहीं बिकता प्रेम हाट में
सिर्फ़ सज़दों से रब नहीं मिलता !
कमाल की पंक्ति है.शुभकमनाएं

निर्मला कपिला said...

दर्द भुलाकर जीना सीख
गुस्से को तू पीना सीख
बहुत हसीन मिली ज़िन्दगी
फटे दिलों को सीना सीख
हरदीप जी सभी मुक्तक बहुत अच्छे हैं लेकिन ये मुक्तक दिल को छू गया। बधाई आपको।

डॉ टी एस दराल said...

माना लब हिलना बन्द हुए
दिल तो बहुत कुछ बोलता है !

हाउ रोमांटिक !
सभी मुक्तक बेहतरीन ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

प्रभाव पूर्ण मुक्तक ....अच्छी प्रस्तुति

मनोज कुमार said...

दर्द भुलाकर जीना सीख
गुस्से को तू पीना सीख
बहुत हसीन मिली ज़िन्दगी
फटे दिलों को सीना सीख !
सुन्दर भाव!

ललित शर्मा said...


सुंदर मुक्तक के लिए आभार

एंजिल से मुलाकात

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढ़िया मु्क्तक हैं। बधाई स्वीकारें।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

हरदीप जी,
आपके सारे मुक्तक जीवन को परिभाषित करते हैं ,अच्छे लगे ,मगर
इस मुक्तक ने तो वास्तव में दिल जीत लिया !
दर्द भुलाकर जीना सीख
गुस्से को तू पीना सीख
बहुत हसीन मिली ज़िन्दगी
फटे दिलों को सीना सीख !
बहुत बहुत शुक्रिया!
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

Sunil Kumar said...

ना चुप मेरी कायरता है
ना चुप मेरी महानता है
माना लब हिलना बन्द हुए
दिल तो बहुत कुछ बोलता है
बहुत बढ़िया मु्क्तक हैं, बधाई

udaya veer singh said...

beloved

hardeep ji ,

satshriakal !

koshishen makul dava-e-jakhm hoti hain /afshosh !jindagi men mukammal kuchh bhi nahin /

sarahniya prayas .abhar /

हरकीरत ' हीर' said...

ना चुप मेरी कायरता है
ना चुप मेरी महानता है
माना लब हिलना बन्द हुए
दिल तो बहुत कुछ बोलता है !

जब लब ही बंद हैं तो दिल का बोलना कोई मायना नहीं रखता .....

@ फटे दिलों को सीना सीख .....
बेहतरीन पंक्ति .....