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Monday, January 31, 2011

तब आप क्या करोगे... ?














जब आपकी प्रार्थना का फल ईश्वर किसी और को दे देता है... तब आप क्या करोगे... ?

सभी दोस्तों ने बहुत ही सुन्दर विचार लिखकर पोस्ट का जवाब दिया है , जिस के लिऐ मैं  सब की आभारी हूँ !



हम कुछ ऐसे भी इस सवाल का जवाब दे सकते है......


तब हम किसी और के लिऐ प्रार्थना करेंगे  !



Sunday, January 23, 2011

मेरे गांव की फिरनी*

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेरे गांव की फिरनी*

 यूँ  पड़ गई वो सोच में

 अब आते कम हैं.....

हर कोई जाने की सोचे

मैं तो खड़ी वहीं हूँ

जहाँ छोड़ गए तुम

अब प्रदेसी होकर

भूल गए गांव को

भला सब का चाहूँ

न कोई शिक़वा मुझको

 फिर से फेरा डालो

ओ मेरे वतन वालो....

इन्तजार है उसको

 वो दिल से पुकारे

एक बार आ जाओ ....

फिर से जो तुम

देखो गांव के नजा़रे !

हरदीप कौर सन्धु

 * गांव के चारों ओर बना कच्चा/ पक्का रास्ता 

 

 

 



Saturday, January 15, 2011

अम्मा















1. अख़बार में

अम्मा देख तस्वीरें

खबरें सोचे!

2. चढ़ती धूप

 अकेली आज  बैठी  

अम्मा है चुप !


हरदीप कौर सन्धु
(बरनाला)  









     

Wednesday, January 12, 2011

लोहरी (लोहड़ी)




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लोहरी की लख-लख बधाई!

लोहरी को पंजाब में लोहड़ी बोला जाता है ।
यह त्यौहार १३ जनवरी ( पौष माह का आखिरी दिन) को मनाया जाता है ।  

मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर पंजाब और हरियाणा प्रदेशों  में  बड़ी धूम-धाम से 'लोहड़ी '  का त्यौहार मनाया जाता है | 
यह पंजाबियों  का बहुत ही प्रिय त्यौहार है | लोहड़ी के कुछ दिन पहले से ही  छोटे-छोटे बच्चे "सुन्दर मुन्द्रिए  हो, तेरा कौन विचारा"  इत्यादी गाते हुए  उपले (पाथी) या लकड़ी इक्ठे करने लगते है | बच्चे कुछ ऐसा भी गाते हैं........... लोहड़ी के गीत ..........

सानू दे लोहड़ी
तेरी जीवे जोड़ी  
 दे माई पाथी
तेरा मुन्डा 
चढ़िया हाथी
हाथी हेठ कटोरा
तेरा पुत्त जंमुगा गोरा
गोरे ने खाधी टिक्की
तेरे पुत्त-पोतरे इक्की
इक्कीयाँ ने कीती कमाई
सानू टोकरा भरके पाईं ................
चार कु दाने खिल्लां दे
पाथी लैके हिल्लांगे !!!!

शाम  के समय आग जलाई जाती है | लोग अग्नि के चारों  ओर चक्कर काटते  है और तिल डालते हैं । आग के चारों  ओर बैठकर स्त्री, पुरुष और  बच्चे  आग सेंकते  है और  मूँगफली ,  रेवड़ी व मक्का के  खिल्ले  आदि बड़े  आनंद से खाते है | लोग एक दूसरे को लोहड़ी की बधाई देते है | घर में  वधु की पहली लोहड़ी और बच्चे  की पहली लोहड़ी बहुत अच्छे  ढंग  से मनाई जाती है | 

1.लोहड़ी आई
मूँगफली-रेवड़ी
जमके खाई !
 2.आई लोहड़ी
 आशायों के खिलते
फूल बसंती !
3.लोहड़ी आए
आलस्य सुस्ती हम
दूर भगाएँ !
4.लोहड़ी आई
निष्क्रियता की जड़
चूल्ले पाई !
5.लोहड़ी जले
सब यूँ हिलमिल
डालते तिल !
6.माघ जो चढ़े
लोहड़ी उपरान्त
ऋतु बदले !       

हरदीप कौर सन्धु
(बरनाला)  










 

Saturday, January 8, 2011

ताजमहल- प्रेम का प्रतीक

















ताजमहल
है एक अमरकृति

शाहजहां ने बनवाया था
याद में मुमताज की

होना चाहिए मन-पावन
देख बुलंदी ताज की

दूधिया सी चांदनी में
देख आकृति ताज की

होश ही खो जाती है
मदहोश जवानी आज की

होती है यूँ तारीफ
उंगलियों के घुमाव से

ताज के गुबंद की
ताज की उठान की

''वाह क्या पाई है जवानी....
रात भी जवां है...
और जवां है ताज भी ''

अधेड़ उम्र वालों की
आँखें ही नहीं होती गलत
गंदे हो जाते ख्याल भी

नहीं देखते वो ताज को
अपनी नापाक निगाहों से

देखते हैं वो....
किसी हसीना के शबाब को
हुसन की उठान को

उभरे गुबंद ताज के
लगते हैं उनको....
उभरे जोबन मुमताज के

अपनी हवस की तुलना
करते हैं वो....
बादशाह शाहजहां से

उफ़्फ़ !
अर्थ ही बदल डाले
इस प्रेम-प्रतीक के
दुनिया के अद्धुत शाहकार के
अपने नापाक ख्यालों से !
हरदीप  

Thursday, January 6, 2011

जिन्दगी का रस


दोनों हाथों निचोड़ो
बहाओ रस की निर्झरी
जिन्दगी के फल से 

 हरदीप सन्धु ( बरनाला)

Monday, January 3, 2011

सजल आँखें
















आज कुछ पिंघला
शायद पिछली सुधियाँ
सजल हुईं आँखें

हरदीप कौर सन्धु ( बरनाला)