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Monday, January 31, 2011

तब आप क्या करोगे... ?














जब आपकी प्रार्थना का फल ईश्वर किसी और को दे देता है... तब आप क्या करोगे... ?

सभी दोस्तों ने बहुत ही सुन्दर विचार लिखकर पोस्ट का जवाब दिया है , जिस के लिऐ मैं  सब की आभारी हूँ !



हम कुछ ऐसे भी इस सवाल का जवाब दे सकते है......


तब हम किसी और के लिऐ प्रार्थना करेंगे  !



17 comments:

डॉ टी एस दराल said...

---तब प्रार्थना सफल होती है ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

फल का मिलना ही बहुत है ......दुआ करेंगे कि जिसे फल मिला वो खुश रहे

सहज साहित्य said...

बहन मैं तो खुशी मनाऊँगा कि भगवान ने मुझे किसी के हित के लिए प्रार्थना करने का सौभाग्य दिया है । वही मेरा सुख है । तुलसी ने कहा है -परहित सरिस धरम नहिं भाई ।
परपीड़ा सम नहिं अधमाई ॥

ktheLeo said...

दरअसल, भगवान के फ़ैसलों की समीक्षा करना शायद उसकी, नीयत पर शक करने जैसा होगा! खुदा को यह सोच कर दुआ करना कि वो सिर्फ़ मेरी सुने या मेरे पर मेहरबान रहे क्योकि मैं उसे याद करता हूँ ,Bater जैसा लगता है!

मैं तो उसे याद रखता हूँ के वो सब पर मेहरबान रहें, और मैं खुद तो हिस्सा हूँ ही उसकी काईनात का!

सुनील गज्जाणी said...

नमस्कार !
अगर इंसान ये हरकत करे तो समाज आ जाती मगर जब भगवन ये करे तो सोचना पड़ता है कि शायाद ये हमारे भाग्य में नहीं था , और ये बात भी है श्रीमद भागवत गीता के अनुसार कि ''कर्म करो फल कि चिंता मत करो ''
ये भी कि जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया .!
--

udaya veer singh said...

nanak nam -----------tere bhane sarbat da bhala .

kshama said...

Jo phal paye,so khush rahe!
Ho sakta hai ki usne bhee wahee dua kee ho!

मनोज कुमार said...

मैं तो तब भी यही कहूंगा,
बस मौला ज्‍यादा नहीं, कर इतनी औकात,

सर उँचा कर कह सकूं, मैं मानुष की जात!

Coral said...

हम खुश हो जायेंगे की आज भी भगवान की नजरोमे हम इंसान है !

kunwarji's said...

ह्रदयो को टटोलती पोस्ट....

पता नहीं क्यों मै ये सोचता हूँ कि हम बस प्रार्थना करने तक ही सिमित है....या वहा तक भी नहीं.....या....

इस विषय पर कुछ भी नही!कुछ पल के दुख़ जब बहुत लम्बे हो जाते है तो हम ऐसा-वैसा सोचने पर मजबूर हो जाते है,और लगता है जैसे परमात्मा से दूर हो जाते है!

पर शायद ऐसा तो हो ही नहीं सकता!

उफ़ ये मै क्या शुरू कर रहा हूँ..???

कुंवर जी,

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

उस परमपिता को धन्यवाद दूँगा कि कम से कम प्रार्थना का फल किसी ऐसे को दिया जिसको उसकी ज्यादा ज़रूरत थी !

daanish said...

जब आपकी प्रार्थना का फल
ईश्वर किसी और को दे देता है...
तब आप क्या करोगे... ?

सोचूंगा ,,,,
मेरी प्रार्थना सुनी तो जा ही रही है

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

ईश्वर ने मेरी प्रार्थना सुनी :)))

amrendra "amar" said...

kisi ko bhi mile kuch mile to jariya koi bhi ho ........sab khus rahe......
sunder panktiyan
http://amrendra-shukla.blogspot.com

Bhushan said...

मैंने धन माँगा वह लक्ष्मी मित्तल जी को मिला. मेरी प्रार्थना का फल उनको मिला इसका निर्धारण तो मैं आसानी से कर लूँगा. लेकिन इस पर मित्तल को कैसे विश्वास होगा. क्या मित्तल हिंदी के टीचर बनना चाहते थे जो मैं हिंदी में एम.ए. कर गया :))

संतोष पाण्डेय said...

हमारी दुआओं का फल किसी और को मिले तो बुरा नहीं. तब तो एक दिन जरूर ऐसा होगा क़ि दूसरों की दुआओं का फल हमें मिलेगा.हम इंतजार करेंगे.

Nirmal Bajwa said...

God is the ultimate planner, we can only see the present but he has the vision which is beyond our imagination. faith is the key. once we have un conditional faith and trust then even prayers are not required.