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Friday, February 25, 2011

जिन्दगी एक साया


1

साया ही तो है 
हमारी  ये  जिन्दगी 
धूप- छाँव का !
2
दुःख आएँ तो 
वही यह जिन्दगी 
लगे कुरूप !
3
खुशी मिली तो 
हर पल जीवन
बना संगीत !
4
दुखी ज़रा से 
कोसते ही रहते 
हम रब को 
5
खुशियाँ आईं
याद नहीं रहता 
अब वो खुदा !
6
बाँटने से ही 
दुःख कम हो जाता 
प्रेम बढ़ता 
7
साथ तुम्हारा 
आखिरी दम तक 
न छोडें हम !
8
भूल न पाया 
जब - जब साँस ली 
तू याद आया !
9
सोच के पंख 
मिल गए तुमसे 
उड़ता जाऊँ!

10
नभ में पाखी
 यूँ ही  बिन पंखों के 
उड़ते ख्याल !

हरदीप सन्धु
( बरनाला) 


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Saturday, February 12, 2011

मुस्कान


मुस्कान एक ऐसी गोलाई है जो सभी को सीधा कर देती है

ऐसी गोलाई
करे सभी को सीधा
वो है मुस्कान
हरदीप सन्धु
 ( बरनाला)