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Friday, February 25, 2011

जिन्दगी एक साया


1

साया ही तो है 
हमारी  ये  जिन्दगी 
धूप- छाँव का !
2
दुःख आएँ तो 
वही यह जिन्दगी 
लगे कुरूप !
3
खुशी मिली तो 
हर पल जीवन
बना संगीत !
4
दुखी ज़रा से 
कोसते ही रहते 
हम रब को 
5
खुशियाँ आईं
याद नहीं रहता 
अब वो खुदा !
6
बाँटने से ही 
दुःख कम हो जाता 
प्रेम बढ़ता 
7
साथ तुम्हारा 
आखिरी दम तक 
न छोडें हम !
8
भूल न पाया 
जब - जब साँस ली 
तू याद आया !
9
सोच के पंख 
मिल गए तुमसे 
उड़ता जाऊँ!

10
नभ में पाखी
 यूँ ही  बिन पंखों के 
उड़ते ख्याल !

हरदीप सन्धु
( बरनाला) 


-

24 comments:

सहज साहित्य said...

हरदीप जी आपके ये तीन हाइकु तो दिल में घर कर जाते है।
7
साथ तुम्हारा
आखिरी दम तक
न छोडें हम !
8
भूल न पाया
जब - जब साँस ली
तू याद आया !
9
सोच के पंख
मिल गए तुमसे उड़ता जाऊँ!
सातवें हाइकु में सच्चे प्रेम की निष्ठा पिरो दी है तो जिससे हम प्रेम करते हैं उसकी याद हमारी साँसों में बसी रहती है। उसको भूलना तो खुद को भूलना है । कल्पना के पंखों ने जो उड़ान भरी है, वह आपके हाइकु की ऊँची उड़ान है , जो हिन्दी हाइकु जगत पर छा रही है और पंख लगाकर आस्ट्रेलिया से बाहर भी जा रही है । ये हाइकु ऐसे हैं जिनकी खुशबू हर संवेदनशील मन को छू लेती है

Dilbag Virk said...

ek se bdhkar ek hain sare haaiku
baat khuda ki ho ya kisi apne ki yah haaiku to dono halaton men lazvab hai .
भूल न पाया
जब - जब साँस ली
तू याद आया

डॉ टी एस दराल said...

हाइकु के ज़रिये , जिंदगी का सुन्दर पाठ पढाया है हरदीप जी ।
बेहतरीन ।

Devi Nangrani said...

hardeep ji
aapke haiku padhne par zindagi ke aur kareeb se milne ki kshamata badh jaati hai..Bahut hi acche hain ..AAkhri dam tak n chodein!!! Waah !!

शिखा कौशिक said...

bahut sundar bhavabhivyakti.

मनोज कुमार said...

कम शब्दों में अधिक बात कह देने की काव्य की यह पद्धतो काफ़ी रोचक और अच्छी है। उसपर यदि आपके सधे कलम का साथ हो तो सोने में सुहागा।

daanish said...

कम शब्दों में
जिंदगी का फलसफा बयां कर पाना
हर किसी के बस की बात नहीं,,,,
आपने
कर दिखाया ..... !!

udaya veer singh said...

kavya ka shilp utkrist to hai hi,
vicharon ke ,bhavnaon ka samnvaya
sarlata ,sahajata pradan karta hai .
bahut khub .dhanyavad hardeep ji .

यशवन्त माथुर said...

दिल को छू गए आपके ये सभी हाइकू.

सादर

Kajal Kumar said...

वाह एक से बढ़ कर एक.

amrendra "amar" said...

दिल को छू गए आपके हाइकू।
जिंदगी का सुन्दर पाठ पढाया है

बेहतरीन*****

Dr Varsha Singh said...

हाइकु के एक-एक शब्द भावपूर्ण ..... बहुत सुन्दर...

हरकीरत ' हीर' said...

खेल अनोखा
कम शब्दों का
हाइकू तेरा

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब्सुरातु से लिखा ज़िंदगी का फलसफा

Sunil Kumar said...

भूल न पाया
जब - जब साँस ली
तू याद आया
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01-03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

Udan Tashtari said...

सभी एक से बढ़ कर एक...वाह!

sagebob said...

ज़िन्दगी के फलसफे को बयां करते अणु गीत.
सबसे बढ़िया मुझे लगा...

खुशियाँ आईं
याद नहीं रहता
अब वो खुदा !

सलाम.

मोहिन्दर कुमार said...

पारखी नहीं मैं
फ़िर भी कुछ है
जो दिल छूता है

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सभी कविताएं एक अलग ही भाव-संसार में ले जाती हैं...बहुत ही गहरे भाव !....बधाई !

Kailash C Sharma said...

कुछ शब्दों में गहन चिंतन...बहुत सुन्दर

Bhushan said...

खुशी मिली तो
हर पल जीवन
बना संगीत!

बहुत अच्छे हाइकुओं का सृजन किया गया है.

Kunwar Kusumesh said...

सभी अच्छे हाइकु.
आप तो प्रसिद्द हाइकुकारों में हैं.

Khare A said...

ek dam steek bat kahi aapne

jindgi dhoop chhanv hi he

badhai