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Saturday, March 12, 2011

माँ-बिटिया















1.जग में प्यारी


     फुलवारी है नारी


              प्रेम-दया की !


2. माँ के आँगन
      
          फूलों जैसी बिटिया
     
                           दिव्य सर्जन !

12 comments:

sagebob said...

माँ के आँगन

फूलों जैसी बिटिया

दिव्य सर्जन

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.
मां की सोच को सार्थक करती हुई.
सलाम

सहज साहित्य said...

हरदीप जी आपक दोनों ही हाइकु मर्मस्पर्शी और महत्त्वपूर्ण हैं। नारी के लिए प्रयुक्त उपमान( प्रेम-दया की फुलवारी है नारी) उपयुक्त है तो बेटी को दिव्य सर्जन कहकर सब कुछ कह दिया है। ये सरस हाइकुअपना अलग स्थान बनाएँगे।

वन्दना said...

बहुत सुन्दर ख्याल्।

डॉ टी एस दराल said...

बहुत कोमल अहसास ।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी दोनों कविताओं के लिए आपको हार्दिक बधाई।

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी क्षणिकाएं।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

हृदयस्पर्शी क्षणिकाएं ....

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

Recent Visitors और You might also like यानी linkwithin ये दो विजेट अपने ब्लाग पर लगाने के लिये इसी टिप्पणी के प्रोफ़ायल द्वारा "blogger problem " ब्लाग पर जाकर " आपके ब्लाग के लिये दो बेहद महत्वपूर्ण विजेट " लेख Monday, 7 March 2011 को प्रकाशित देखें । आने ब्लाग को सजाने के लिये अन्य कोई जानकारी । या कोई अन्य समस्या आपको है । तो "blogger problem " पर टिप्पणी द्वारा बतायें । धन्यवाद । happy bloging and happy blogger

दर्शन कौर धनोए said...

माँ और बेटी का रिश्ता ही कुछ ऐसा है सुंदर भाव रचना !

दिगम्बर नासवा said...

सच में माँ के लिए ये एक दिव्य स्रजन ही है ... जो पुरुष भी नही कर सकता ....

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! बधाई!

Bhushan said...

बहुत सुंदर हाइकु और दिव्य सृजन करती बिटिया का स्वरूप. वाह...