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Thursday, March 17, 2011

मिट्टी का घरौंदा















पैरों पर



मिट्टी थप- थपाकर


छोटा सा एक  घरौंदा


कभी बनाना


कभी तोड़ देना


जब दिल करता


हँसना-गाना


मौज मनाना


कभी -कभी रो देना


याद आता है


आज फिर वही


वो तुतलाता बचपन


वो बेफ़िक्री


वो भोलापन !
 
हरदीप कौर संधु    
(बरनाला )



19 comments:

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

याद आता है


आज फिर वही


वो तुतलाता बचपन


वो बेफ़िक्री


वो भोलापन !

बहुत अच्छी लगी आपकी कविता !
होली की शुभकामनाएँ !

सहज साहित्य said...

आपने खूब कहा है । बचपना सबसे कीमती होता है । मैं तो यही कहना चाहूँगा - लौटा नहीं सकते हम चाहकर भी खोया बचपन
भले ही हम पा जाएँ दुनिया की सत्ता , लेकिन पा नहीं सकते भोलापन!

-आपने खूब कहा है

डॉ टी एस दराल said...

बचपन के दिन कितने बेफिक्र होते हैं ।
सुन्दर अहसास ।

Kailash C Sharma said...

सच में बचपन का समय अनमोल है..बहुत सुन्दर

यशवन्त माथुर said...

बचपन के दिनों की बात ही कुछ और होती है.


सादर

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर यादें ...अच्छी प्रस्तुति

मनोज कुमार said...

भावप्रवण रचना।

kshama said...

याद आता है


आज फिर वही


वो तुतलाता बचपन


वो बेफ़िक्री


वो भोलापन !
Haay! Kab kaun bhula paya ye sab??Bhavon ko bahut sundarta se,kam shabdon me dhala hai!

हरीश प्रकाश गुप्त said...

बहुत सुन्दर,

Udan Tashtari said...

बचपन याद आया...सुन्दर रचना.

ktheLeo said...

यादों का सफ़र अच्छा लगा!

अन्तर सोहिल said...

बहुत प्यारी पंक्तियां हैं जी, धन्यवाद
छोटे थे तो सोचते थे कब बडे होंगे और अब बचपन याद आता है।

प्रणाम

sagebob said...

ਬਚਪਨ ਯਾਦ ਆਇਆ ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਖੁਦਾ ਯਾਦ ਆਇਆ .
ਬਹੁਤ ਪਿਆਰੀ ਰਚਨਾ ਹੈ.
ਹੋਲੀ ਦੀਆਂ ਮੁਬਾਰਕਾਂ.

Bhushan said...

घरौदे से बढ़ कर और कौन सा सजीव सपना हो सकता है, याद नहीं. रेत हो, मिट्टी हो, ईंट हो, गारा हो, सभी से तो घरौंदा बनाने ललक बचपन में होती है. घरौदे पर आपकी कविता बहुत कुछ याद दिला गई.

kshama said...

Holi bahut mubarak ho!

यशवन्त माथुर said...

आप को सपरिवार होली की हार्दिक शुभ कामनाएं.

सादर

ktheLeo said...

’होलिका वध’ शुभ हो!
’मदनोत्सव’और रंगपर्व की सभी को बधाई

Dr (Miss) Sharad Singh said...

आज फिर वही
वो तुतलाता बचपन
वो बेफ़िक्री
वो भोलापन !....

भावनाओं का बहुत सुंदर चित्रण ...बधाई...
होली की हार्दिक शुभकामनाएं !

दर्शन कौर धनोए said...

याद आता है
आज फिर वही
वो तुतलाता बचपn
वो बेफ़िक्री
वो भोलापन !

बहुत अच्छी लगी आपकी कविता !
होली की शुभकामनाएँ ......D.