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Friday, March 25, 2011

भारतीय नारी


भारतीय नारी



निभाती है


ऊँची पदवियों से भी


ऊँचे रिश्ते


कभी बेटी ....


कभी माँ बनकर


या फिर किसी की पत्नी बनकर


फिर भी मर्द


ये सवाल क्यों पूछे -


कैसे बढ़ जाएगी


उम्र मेरी ?


तेरे रखे व्रतों से ?


अपनी रक्षा के लिए


अगर आज भी तुम्हें


बाँधना है धागा


इस इक्कीसवीं सदी में


तेरा जीने का क्या फ़ायदा ?


सुन लो....


ओ भारतीय मर्दो


यूँ ही अकड़ना तुम छोड़ो


आज भी भारतीय नारी


करती है विश्वास


नहीं-नहीं....


अन्धा विश्वास


और करती है


प्यार बेशुमार-


अपने पति


बेटे या भाई से ।


जिस दिन टूट गया


यह विश्वास का धागा


व्रतों से टूटा


उस का नाता


कपड़ों की तरह


पति बदलेगी


फिर भारतीय औरत


जैसे आज है करती


इश्क़ पश्चिमी औरत


न कमज़ोर


न अबला-विचारी ।


मज़बूत इरादे रखती


आज भारत की नारी


धागे और व्रतों से


रिश्तों की गाँठ


और मज़बूत वह करती


जो जल्दी से नहीं खुलती,


प्यार जताकर


प्यार निभाती


भारतीय समाज की


नींव मजबूत बनाती ।


दो औरत को


उसका प्राप्य सम्मान


नहीं तो.....


रिश्तों में आई दरार


झेलने के लिए


हो जाओ तैयार !!

हरदीप कौर सन्धु
( बरनाला)

16 comments:

विशाल said...

बहुत ही अच्छी रचना.
भारतीय औरत को सही सम्मान देने की राह दिखाती हुई.
सलाम.

Udan Tashtari said...

निश्चित ही संपूर्ण सम्मान मिलना चाहिये...सुन्दर रचना.

दर्शन कौर धनोए said...

बहुत ही अच्छी रचना.

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...नारी को उसका उचित स्थान तो मिलना ही चाहिए..बहुत सुन्दर रचना

सहज साहित्य said...

डॉ हरदीप की भारतीय नारी के व्यक्तित्व की नए सिरे से व्याख्या करती बहुत दमदार कविता है । सभ्यता के बिकास के नाम पर नंग्नता को आदिम सभ्यता माना जा सकता है , आधुनिक नहीं । आधुनिकता के नाम पर ज़्यादातर शोषण के नए तौर -तरीके ही तलाश किए गए हैं । ये तरीके नित नई समस्याओं और पारिवारिक विघटन और अशान्ति को ही बढ़ावा दे रहे हैं ।

Dilbag Virk said...

sunder kvita
bhartiy nari kmjor nhin , haan bhavuk aur sahriday zroor hai
दो औरत को
उसका प्राप्य सम्मान
नहीं तो.....
रिश्तों में आई दरार
झेलने के लिए
हो जाओ तैयार !!
bdhaai ho
backdoor entry-laghu katha

kshama said...

Behad sashakt rachana!

Dr (Miss) Sharad Singh said...

प्यार जताकर
प्यार निभाती
भारतीय समाज की
नींव मजबूत बनाती ....

भारतीय नारी पर सुन्दर कविता....
मर्मस्पर्शी एवं भावपूर्ण काव्यपंक्तियों के लिए कोटिश: बधाई !

Bhushan said...

नारी के सम्मान के लिए लिखी बहुत अच्छी पंक्तियाँ. आखिर में तो नारी की तरेरी हुई धमकी भी नज़र आई. अच्छा लगा.

udaya veer singh said...

vidambana hai aajtak ham ubar nahin paye hain apani rudhhivadi soch se ,samanata swikary hai to kisi akpakshiya parmpara ki lod nahin .pujya
hai nari ,dhage to purush ko bandhane honge ,nayak banane ka swang karta raha
hai sadiyon se . .fir bhi apke badappan ki kadra karte hain , sundar rachana . dhanyavad.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर हरदीपजी....अर्थपूर्ण ..ओजपूर्ण रचना

Patali-The-Village said...

भारतीय औरत को सही सम्मान देने की राह दिखाती हुई बहुत सुंदर रचना|

Dinesh pareek said...

होली की बहुत बहुत शुभकामनाये आपका ब्लॉग बहुत ही सुन्दर है उतने ही सुन्दर आपके विचार है जो सोचने पर मजबूर करदेते है
कभी मेरे ब्लॉग पे भी पधारिये में निचे अपने लिंक दे रहा हु
धन्यवाद्

http://vangaydinesh.blogspot.com/
http://dineshpareek19.blogspot.com/
http://pareekofindia.blogspot.com/

Dinesh pareek said...

होली की बहुत बहुत शुभकामनाये आपका ब्लॉग बहुत ही सुन्दर है उतने ही सुन्दर आपके विचार है जो सोचने पर मजबूर करदेते है
कभी मेरे ब्लॉग पे भी पधारिये में निचे अपने लिंक दे रहा हु
धन्यवाद्

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हरीश सिंह said...

आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
डंके की चोट पर

Apanatva said...

badee acchee rachana.......
jo ant me chetavanee dene ke rang me aur bhee sashakt lagee.........