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Friday, April 1, 2011

होता है यूँ भारत में....

भारत मेरा
    करता है सम्मान
   हर धर्म का !
***

ऐसा करना
शौक तो नहीं होगा,
है मज़बूरी !
***

साधू बाबा ने
 उड़ा दी यूँ धज्जियाँ
दी सूचना की !
***



युग मशीनी
फलों की टोकरी यूँ
बदल गई !
***

जल्दी करो रे
धकेलो मुझे तुम
रेल गाड़ी में!
***


क्या हुआ   भई
है भिखारी का भेस
रखता  पैसा !
***

   ऊपर चढ़ी
  मोटर साइकिल 
   बिन  हाथों के !
***

क्या देख  रहे
किसी की मज़बूरी
या बच्चे स्कूली !
***


साधू हैं तो क्या
 मन चाहता कभी
हम भी खेलें  !
***
( चित्र गूगल के आभार से )
हरदीप कौर सन्धु


8 comments:

यशवन्त माथुर said...

बहुत बढ़िया और यथार्थ सामने रखती हाइकू कविता.

सादर

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh said...

kya khoob hykoo likhe hain...

विशाल said...

अच्छे हाइकु.अच्छी तसवीरें.

सहज साहित्य said...

दैनिक जीवन से जुड़ी मज़बूरियों के साथ हटधर्मिता (हम नहीं सुधरेंगी का भाव लिये) का दसावेज़ हैं ये हाइकु

Dilbag Virk said...

tasviron ka sunder ankan karte haaiku

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सुन्दर हायकू और लाजवाब फोटोज़ के लिए बधाई.

डॉ. हरदीप संधु said...

@ Yashvant ji
@ Sumit ji,
@ Vishal ji,
@ Himanshu ji
@ Virk ji
@ Dr. Sharad ji
आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया है !
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

सुभाष नीरव said...

हरदीप जी
अपने हाइकु के संग इतने सटीक और जानदार चित्र आप कहां से ले आती हैं ! लगता है, गूगल सर्च पर आप बहुत मेहनत करती हैं। हाइकु अच्छे लगे दिये गए चित्रों पर साफ़ बयानी करते हुए।