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Friday, April 15, 2011

देखा चाँद उतरा














आज मैं पहली बार एक हाइकु - कविता आपके सामने पेश करने जा रही हूँ | इस  कविता में 14 हाइकु लिखे गए हैं !

रोटी पकाए
तवे पर जो देखा 
चाँद उतरा (1)
लेकिन ......
ज़िक्र छेड़ा है आज जो 
है किसी और ही चाँद का ......
एक वो चाँद 
जो गगन का चाँद 
देखा करती (2)
हर दिन जिसे मैं 
बहुत दूर है मुझसे 
लेकिन ........
उस चन्दा की 
चाँदनी से ही 
मैं आँचल अपना 
हूँ भर लेती (3)
प्रेम - गाथा में 
चाँद सी चाँदनी की 
होती है चर्चा (4)
यह चाँदनी 
मिलती है सबको 
बिना ही खर्चा (5)
हम सभी को भला क्यों 
लगती प्यारी 
ये चन्दा की चाँदनी 
बता तू ज़रा (6)
बिन चाँदनी 
यह दिल किसी का 
कभी न भरा (7)
देखो खुदाई 
उस खुदा की 
मिलती है चाँदनी 
हमें एक - सी (8)
लेकिन .....
ज़िक्र छेड़ा है आज जो 
है किसी और ही चाँद का ....
माँ बैठी थी चूल्हे पास 
रोटी पकाए 
तवे पर जो देखा 
चाँद उतरा 
अदभुत से 
इस चाँद के बिना 
न पेट भरे (9)
आज हर कोई 
रोटी सा चाँद 
पाने को दिन - रात 
एक जो करे (10)
भूखा हो पेट 
चाँद की ये चाँदनी 
न भाए कभी (11)
ओ मेरे चन्दा 
किस काम की यह 
तेरी चाँदनी (12)
दे दे मुझे वो 
रोटी एक वक्त की 
ओ मेरा खुदा (13) 
देखो खुदाई 
फिर उस खुदा की 
चाँद तवे का 
नहीं मिलता कभी 
हमें एक - सा (14)


हरदीप कौर सन्धु
( बरनाला) 
















22 comments:

Devi Nangrani said...

Priya Hardeep ji
एक जो करे (10)
भूखा हो पेट
चाँद की ये चाँदनी
न भाए कभी (11)
ओ मेरे चन्दा
किस काम की यह
तेरी चाँदनी (12)
Bahut bahut sakaratmak dasha aur disha darsha rahe hain aapke Haiku. Yeh ek accha upyog kiya hai, Shayad kabhi 2 ya 3 haiku se ek tasveer-Bimb Ban jaaye. Prernapradan karne ke liye aabhaar
Devi Nangrani

सहज साहित्य said...

हरदीप जी अच्छे हाइकु रचने में तो सिद्धहस्त हैं ही , उतनी दक्ष प्रयोग करने में भी । आटे की चिड़िया उनकी पहली जुगलबन्दी थी । इसी प्रयोग को डॉ भावना जी ने दीपावली के हाइकु में सफलता पूर्वक किया । यह दूसरा प्रयोग हरदीप जी का है -कविता में मोतियों की तरह हाइकु पिरो दिए हैं । कार्य स्वागत योग्य है। जो लकीर के फकीर हैं हो सकता है , उन्हें अटपटा लगे; क्योंकि ऐसे लोग प्रगति के नाम पर केवल पीछे चलना जानते हैं , नए मार्ग खोजना उनके वश की बात नहीं।

Apanatva said...

ati sunder....

KAHI UNKAHI said...

इसे पढ़ कर एक अलग ही अनुभूति हुई । बड़ा ही नवीन और सुन्दर प्रयोग है । हरदीप जी के सशक्त हाइकु तो पढ़ती ही रहती हूँ, पर हाइकु-कविता...बहुत खूब !
उम्मीद से दुगुना आनन्द...।
मेरी बधाई...यूँ ही खूबसूरती से हिन्दी साहित्य को समृद्ध करते रहिए ।
प्रियंका

वन्दना said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

डॉ टी एस दराल said...

सही कहा । असली चाँद तो यही है ।
हाइकु और कविता का खूबसूरत मिलन ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर प्रयोग ...अच्छी प्रस्तुति

Preet Arora said...

हरदीप मैम,
मैंने आपका हाइकु -कविताये पढ़ी हैं .बहुत ही दिल को छु लेने वाली हैं ....मेरा यह कहना है कि आपने हाइकु के माध्यम से अपने विचारो को प्रस्तुत करने का अलग ढंग से प्रयास किया है .प्रयास सराहनीय है .
बल्कि मुझे तो सुप्रीत का ब्लॉग बहुत ही प्यारा लगा.उसकी प्रशंसा करने के लिये मेरे पास शब्द ही नहीं हैं .मेरा भी ब्लॉग है पर पूरा नहीं बनाना आ रहा मुझे .अगर हो सके तो सुप्रीत मेरा ब्लॉग अपने जैसे बना दे .मुझे बहुत ख़ुशी होगी .मै पता नहीं दिन मे कितनी बारी सुप्रीत का ब्लॉग देख कर और पढ़ कर खुश होती हूँ .काश मेरी भी ये तमन्ना पूरी हो सकती .खैर आपको और सुप्रीत को बहुत -बहुत बधाई.
आपकी
प्रीत अरोड़ा

सहज साहित्य said...

प्रीत बेटी मैं आपकी मदद कर सकता हूं । मैम के पास शायद ज़्यादा समय न हो । कैसा रहेगा ? रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु। rdkamboj@gmail.com

Er. सत्यम शिवम said...

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

दीनदयाल शर्मा said...

हाइकु कविता...खूबसूरत कविता....सुन्दर प्रस्तुति...बहुत - बहुत बधाई....दीनदयाल शर्मा

Sadhana Vaid said...

अद्भुत, प्रयोगधर्मी एवं कथ्य में अनूठी रचना ! बहुत बहुत अढाई !

Bhushan said...

हाइकु की लय के साथ बुनी कविता ऐसी गति से चलती है जैसे चाँद देखने के लिए कोई सीढि़याँ चढ़ता है. बहुत सुंदर प्रयोग और सृजन.

Manav Mehta said...

बेहद सुन्दर रचना.........
शुभकामनाओं सहित....
बधाई.....

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi badhiyaa

Udan Tashtari said...

बढ़िया प्रस्तुति!

udaya veer singh said...

priy hardeep ji
satshri akaal ,

baisakhi ki kakh lakh badhayi
rachanaon ki samvedana apratyaksh
rup se dusare ko bhigoti huyi achhi ban padi hai , sundar abhivyakti /
badhayi.

daanish said...

haayku
vidhaa mei bhi
bahut bahut prabhaavshaali baateiN kaheen aapne ......

mubarakbaad .

Dilbag Virk said...

prvasiyon ke dukh ko byan karti kvita

nae pryas hetu bdhaai

Dr (Miss) Sharad Singh said...

रोटी पकाए
तवे पर जो देखा
चाँद उतरा ...

संवेदना से भरा मार्मिक हायकू...
सभी कविताएं एक से बढ़ कर एक हैं...

हरीश सिंह said...

बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना,
मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके.समाज में समरसता,सुचिता लानी है तो गलत बातों का विरोध करना होगा,
हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

MANI KA HASHIYA said...

प्रिय हरदीप,
तुम्हारी हाइकु-कविता का प्रयोग बहुत ही सुन्दर है। यूँ लगा, मानो नदी सागर में जा समाई हो। मेरी शुभकामना और बधाई...।
मानी