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Sunday, April 24, 2011

अंतरजामी



















1.

अंतरजामी  
बिन शब्दों के जाने 
मन की बात !

2.
जान लेता तू 
देखकर चेहरा 
 दिल की पीड़ !

3.
देखी मुस्कान 
जब मेरे लबों पे 
खुश हुआ तू !

4.
 मेरे वो अश्रु 
शब्द बन समाए 
तेरे दिल में !

5.
दर्द ए दिल 
यूँ सुनाकर तुझे 
हुआ है कम !

हरदीप सन्धु


13 comments:

दर्शन कौर धनोए said...

Sunder kvita !shbdo ka ujaala !nice

udaya veer singh said...

saral ,naishargik kavita
achhi lagi .kuchh aur prayas vanchhit hain .sunder .

सहज साहित्य said...

हरदीप जी आपके सभी हाइकु सरल और बोधगम्य होने के कारण दिल की गहराई में उतर जाते हैं। जीवन में भाषा से अधिक भाव महत्त्वपूर्ण होता है । अपने तो चेहरा क्या, दूर बैठे अपनों के भावों से ही सुख- दुख समझ जाते हैं। उसे शब्दों से पुकारने की ज़रूरत ही नहीं होती । वह सब कुछ जान लेता है ।आपके ये हाइकु हरदिल की गहराई में उतरने वाले हैं। साधुवाद!

रश्मि प्रभा... said...

jazbaaton ki pitari

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सुन्दर...दार्शनिक हाइकू....

मनोज कुमार said...

हाइकु की दार्शनिकता मन को भा गई।

Dr Varsha Singh said...

Excellent Haiku....

सभी हाइकू एक से बढ़कर एक..... वाह!

संजय भास्कर said...

सुन्दर हाइकू

शिखा कौशिक said...

हरदीप जी आपके सभी हाइकु सुन्दर हैं...badhai

Dilbag Virk said...

shaandar

Rachana said...

.
मेरे वो अश्रु
शब्द बन समाए
तेरे दिल में !

दर्द ए दिल
यूँ सुनाकर तुझे
हुआ है कम !
kitna sunder bhav hai
shbd chun chun ke rakhe hain
bahut badhai
rachana

Apanatva said...

wah
kya
baat hai?

Apanatva said...

wah
kya
baat hai?