Followers- From 17 May 2010.....'til today

Friday, April 29, 2011

गए वो दिन


ताँका शब्द का अर्थ है लघुगीत |  ताँका जापानी कविता का एक रूप है जिसमें 5 + 7 + 5 + 7 + 7 के वर्णक्रम में कुल इकतीस वर्ण होते हैं |डॉ सुधा गुप्ता जी ने सन् 2000  में ताँका की रचना शुरू की थी | 2004  और 2009  के संकलनों में उनके कुछ ताँका भी छपे थे | हिन्दी में रामेश्वर काम्बोज ' हिमांशु' जी ने भी ताँका कविताएँ लिखी हैं | इन दोनों प्रतिष्ठित साहित्यकारों की इन रचनाओं से प्रभावित होकर मैंने भी ताँका लिखने की कोशिश की है | आप डा. सुधा जी के ताँका हिंदी हाइकु तथा रामेश्वर जी के सहज साहित्य ब्लॉग पर पढ़ सकते हो | 
पंजाब में जन्मी.. पंजाब की बात किए बिना नहीं रह सकती | मेरे ताँका भी पंजाब की झलक आपको दिखलाएँगे |


 {1}

  गए वो दिन 
 बाण की खाट कहाँ
 हो गई गुम
 वो डिब्बीदार छाँव
 न मिले किसी गाँव ! 





( २ ) 
गिरा जो मुन्ना 
चींटी का आटा गिरा 
पुचकारे माँ 
भूल गई चोट यूँ
  चींटी गई रे कहाँ !

  (३) 
तोड़ उपले 
दादी हारे में डाले 
आग सुलगे 
उर्द की डाल पके 
बहुत धीरे - धीरे !

(४)

बच्चे जो बोले 
न करो बँटवारा
आँगन छोटा 
न दीवार बनाओ 
बोलो कहाँ वो खेलें !

(५)
अम्मा न रुके 
सुनी जो मेघ - ध्वनी 
उपले ढके 
सँभाले चूल्हे - हारे 
जब बादल छाए !

(६)
शादी के दिन
स्पीकर था लगता 
जोड़ दो खाट
विवाह वाले घर 
फिर गाना बजता !

(७)

सरसों  तेल 
लगे नानी के बाल
सोने के तार
धन्य हो गई नानी 
पाया  नातिन  -प्यार !


( ८)

माँ की कढ़ाई
चादर जो बिछाऊं 
माँ स्पर्श पाऊँ 
उठे  हूक कलेजे 
सीने  इसे लगाऊँ !

(९)

गर्मी जो आए
घुंघरू वाली पंखी
अम्मा बनाए 
छन - छन घुंघरू 
गर्मी दूर भगाए !



(१०)

श्रावण माह 
पकते गुलगुले 
माँ की रसोई 
याद मीठी खुशबू
हर श्रावण आई !












हरदीप कौर सन्धु

(बरनाला)   






  









11 comments:

सहज साहित्य said...

ताँका जापानी शैली का लघुगीत है ।डॉ हरदीप सन्धु ने इस विधा में भी अपना कौशल दिखाया है; वह भी अपनी जमीन से जुड़ी बातों को सहज रूप में और दिलकश अन्दाज़ में बयान कर दिया है ।सादगी से दिल को छूना कठिन है; लेकिन हरदीप को इसमें महारत हासिल है ।सभी ताँका इसका जीता -जागता उदाहरण हैं । तहे-दिल से बधाई हरदीप जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तांका के बारे में अच्छी जानकारी ..और सभी रचनाएँ सोंधी सोंधी महक लिए हुए

Bhushan said...

ताँका के बारे में पहली बार सुना. मेरे लिए नई जानकारी. सभी पंक्तियाँ अपना बिंब स्पष्ट अंकित करती हैं.

Dilbag Virk said...

mati ki mahak men srobar taanka

MANI KA HASHIYA said...

ताँका के बारे में पहली बार जाना, वह भी पूरे विस्तार से...। तुम्हारे ताँके बहुत अच्छे हैं...। बड़ी सहजता से अपनी भावनाएँ पाठक तक पहुँचा देती हो ।
मेरी बधाई...।

मानी

Udan Tashtari said...

ताँका विधा के बारे में जानकर अच्छा लगा... कविताएँ भावपूर्ण बनी है.

दिगम्बर नासवा said...

तांका की जानकारी भी अच्छी रही ... और आपकी हाइकु भी ... संवेदनाओं से भरे ... मिट्टी की खुश्बू लिए ...

Rachana said...

bahut sunder tanka hain bhav aur bimb dono ati sunder hai .
bahut bahut badhai
rachana

udaya veer singh said...

is kavyanjali men aap sanskriti ki varis pratit ho rahi hain .sunder rachana ji .shukriya

Babli said...

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सभी तांका, एक से बढकर एक!