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Saturday, May 14, 2011

वस्त्र परिधान पत्रिका में मेरी कविता ख़्वाहिशों के पाखी

मुंबई से प्रकाशित वस्त्र परिधान पत्रिका के  68 वें अंक ( अप्रैल ) में मेरी कविता .ख्वाहिशों के पाखी प्रकाशित हुई है | यह भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की पत्रिका है ...
जिसका पूरा पता है ...
वस्त्र आयुक्त का कार्यालय 
 निष्ठा भवन 
 न्यू मरीन लाईन्स ( चर्चगेट )  
 मुंबई - 400 020  
वैदही जोशी जी इस पत्रिका के सहायक निर्देशक हैं ! इस कार्यालय की  गृह पत्रिका " वस्त्र परिधान " के माध्यम से साहित्यिक रचनाओं के अतिरिक्त इस कार्यालय की गतिविधियों को पाठकों के समक्ष उजागर करने का प्रयास किया जाता है | राजभाषा परिवार की ओर से प्रस्तुत है यह अंक ! जिसमें आप मेरी कविता भी पढ़ सकते हैं ! आशा है आपको अच्छी  लगेगी  ! मैं रामेश्वर कम्बोज जी का दिल से धन्यवाद करती हूँ जिनके आशीर्वाद से मैं यहाँ तक पहुंची हूँ ! 


हरदीप कौर सन्धु
 ख़्वाहिशों के पाखी 
करता रहा तेरे शहर को
अपना बनाने की  मैं कोशिश
झूठ- फ़रेब की  गर्म हवा ने
होने नहीं दिया  वह मेरा.......

आशाओं का नन्हा पौधा
रोपा  था मन के आँगन में
भ्रष्टाचार के  दूषित जल ने
चारों तरफ़ जमाया डेरा …...

नन्हीं  ख़्वाहिशों के पाखी तो
कब के आकरके  बैठे थे
हेरा-फेरी व कपट-जाल ने
कहीं ना होने  दिया बसेरा.........

हमारी सब भोले-भालों की
कुराहे डाली भरी  जवानी
आज के  इन  सब रहबरों  ने
धुँधला कर दिया चार-चुफेरा............

सभी   तैरते   लहरों के संग
कि  वे बदल  डालेंगे  जग को
अब  चीरकर इन लहरों को
हम तोड़ेंगे  इनका घेरा …....



5 comments:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत बहुत बधाई!

संजय भास्कर said...

बहुत बहुत बधाई!

Dilbag Virk said...

sunder kvita
bdhaai ho

रश्मि प्रभा... said...

bahut bahut badhaai

Bhushan said...

व्यक्ति की तमन्नाओं पर आते संकट को आपकी कविता ने भली-भाँति उकेरा है. उपलब्धियों पर बहुत-बहुत बधाई.