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Thursday, June 30, 2011

रब की चिता


बारिश की बूँदों जैसे 
ट्प ट्प अश्रु 
जब पलकों से टपके 
मैंने दिल से पूछा
क्या हुआ ...??
बीता हुआ कोई पल 
है याद आया 
दिल धड़का 
कुछ बोला न 
हमेशा की तरह 
चुप के आँचल में 
छुपाकर दर्द अपना 
बस आँखों से 
बहता चला गया 
मैं समझ गई
कि आज फिर ....
कोई कोख सूली 
चढ़ाई  गई है 
किसी कोख में 
कब्र बेटी की
फिर बनाई गई है 
चिता रब की 
आज फिर जलाई गई है !
हरदीप 


Wednesday, June 29, 2011

' हाइगा' -"पात" कविता -चित्र


जापानी शब्द ' हाइगा' हाइकु की चित्रकारी है |  इस शब्द का अर्थ है कविता  - चित्र | हाइगा दो शब्दों के जोड़ से बना है ..." हाइ" = कविता या हाइकु + "गा" = रंगचित्र ( चित्रकला ) |  हाइगा की शुरुआत १७ शताब्दी में जापान में हुई |  हाइगा में तीन तत्व होते हैं - रंगचित्र + हाइकु कविता + सुलेख |
रंगचित्र चाहे   हाइकु के बिम्ब न भी बता रहा हो लेकिन इस दोनों में घनिष्ट संबंध होता है | उस जमाने में  हाइगा रंग - ब्रुश  से बनाया जाता था | लेकिन आज  डिजिटल फोटोग्राफी जैसी आधुनिक विधा से  हाइगा लिखा जाता है|























हरदीप 

Sunday, June 26, 2011

गीटे खेलना

ढली दुपहिर आथण वेले 
निक्कीयाँ कुड़ियाँ घर दे विहड़े 
आन जद जुड़ीयाँ खेडण रुझीयाँ
सब तों जियादा खेड़ पियारी
खेडण गीटे वारो -वारी 
गीटे चुकदीयाँ इक-इक करके 
इयों लगदा जिवें चुगदीयाँ  रिश्ते 
फेर ..........
इक हथ नाल बणाके घर 
इक -इक गीटा 
बोच -बोचके करदीयाँ  अन्दर 
इयों लगदा जिवें .......
'कठे करके सारे रिश्ते 
ओह सिखदीयाँ हुण बनणा घर 
इक हथ नाल सारे गीटे 
बोच-बोचके जिहड़ी बुच लैंदी 
वड्डे -छोटे सारे रिश्ते 
नाले आवदे हाण दे रिश्ते 
आपणी झोली पाऊणा सिख लैंदी !
हरदीप 

Saturday, June 18, 2011

चींटी का गिर गया आटा....

बचपन की थीं नन्हीं -नन्हीं सी बातें 
छोटी -छोटी खुशियाँ तुतलाती फरियादें 
कभी खेलते हम छुपम-छुपाई
खेलने लगते कभी पकड़म  -पकड़ाई
उछलना -कूदना सबको भाता 
खेलते -खेलते  कोई रूठ जाता 
खेल-कूद में कोई गिर जाता 
चींटी का तो सारे का सारा 
ज़मीं पर आटा बिखर जाता 
रोते हुए को माँ पुचकारती 
आँसू भरी अँखियों से 
हमको चींटी ढूंढने में लगाती 
चींटी ढूँते चोट भूल जाते 
उठकर फिर खेलने लग जाते 
वो भोला बचपन अब क्यों नहीं आता
 अब क्यों नहीं गिरता चींटी का आटा ?
हरदीप 



Friday, June 17, 2011

मित्रता


Friends Forever images

1.
अनजाने में ही भला , यह हमसे क्या हुआ
दिल दुखाया आपका , तभी दर्द हमारे हुआ !

2.
दिल में है जो आज मेरे  , कह रही मेरी  कलम
मित्र बनकर आपके , कभी धोखा न देंगे हम !


3.
मित्रता को हम भी , हैं करते बहुत प्यार
परीक्षा लेना जब चाहो  , हम बैठे तैयार !

हरदीप    

Tuesday, June 14, 2011

रुतबा पिता का

( डा. अमरजीत सिंह बरार - 20 अप्रैल 1940 - 14 जून 1991 )

आज मेरे डैडी को हम से बिछुड़े २० वर्ष हो गए हैं | आज भी जब डैडी मेरे सपनों में आते हैं तो मैं पूछती हूँ कि आप हमको छोड़कर क्यों चले गए ...कहाँ चले गए थे ..??? अब हम आपको पकड़कर रखेंगे ....आपको कहीं जाने नहीं देंगे .....आपको पता है इतने वर्ष हमने आपके बिना कैसे गुजारे.....??? .....और जब सपना टूटता है ....

 याद उसे किया जाता है जो भूल जाए ..डैडी तो  हरदम मेरे  सांसों में समाए हुए हैं  ....आज मैं इन शब्दों से अपने पिताश्री को विनम्र श्रद्धांजलि दे रही हूँ .........  




कलम स्याही 
बार-बार करती 
माँ का ही ज़िक्र 
हर पन्ना सजाएँ
पिता की बात 
भला क्यों नहीं होती 
ये तो बताएँ
ममता की मूरत 
माँ प्रेम - देवी 
माने जहान सारा 
बिन पिता के 
घर -परिवार का 
कहाँ गुजारा
पकड़कर हाथ 
नन्हे -मुन्नों का
चलना वो सिखाए 
पिता का जूता 
बेटे को जब आए 
मित्र बेटे का 
खुद वो बन जाए 
पहली रोटी 
जब बेटी पकाए 
चाहे हो कच्ची 
पिता को वो लगती 
पकवानो से 
बहुत ज्यादा अच्छी 
पिता का नाम 
जीवन किताब के 
पन्ने -पन्ने पे 
जगमगाए  लिखा 
कौन है जो ले 
बच्चों के जीवन में 
पिता का वो रुतबा !


हरदीप 


Friday, June 10, 2011

कौन चाहेगा


कौन  चाहेगा 

अपने मन को रुलाना 
इन आँखों में 
आँसुओं को बसाना
दर्द देता है
जब ये ज़माना 
बन जाती हैं
तब  ये  डरी आँखें
 आँसुओं का ठिकाना 
मगर 
इन डरी आँखों में 
आँसू मत लाना 
जीने नहीं देगा 
तुमको ये ज़माना 
इन डरी आँखों में 
ये तिरते आँसू
कुछ कह रहें हैं ...
इन आँसुओं  से
ये डरी आँखें 
 और साफ हुईं हैं .....
इस कपटी दुनिया को 
साफ -साफ देखने के 
काबिल हुईं हैं .....
कोई पोंछे या न पोंछे 
इन डरी आँखों के 
आज ये आँसू 
कोई गम नहीं .....
आज के बाद 
इस ज़माने को 
देखकर साफ-साफ 
कभी भी न तिरेंगे 
इन अँखियों में आँसू 
होगा अब यहाँ 
हिम्मत का ठिकाना 
इन अँखियों की दृढ़ता 
अब देखेगा ज़माना !
हरदीप 

Sunday, June 5, 2011

गुम हुए हम

साबुन -लोशन लगाकर 
चमड़ी गोरी कर ली है 
दिल को धोने वाला 
अभी कुछ बना नहीं 
प्यार -मोहब्बत वाली सबातें*
आज जर्जर खंडहर हुईं  
फिर से बनाने का विकल्प  
अभी तक कोई मिला नहीं 
गुम हो गए  कहीं
घर आज मकानों में 
ढूंढ़ने का कोई प्रयत्न 
अभी तक किया नहीं !
हरदीप     
* घर में एक बड़ा सा कमरा जहाँ परिवार के सभी लोग खाट से खाट जोड़कर बैठते और रात को देर रात तक बातें करते  



Wednesday, June 1, 2011

चाचा खुशिया गया कानेडा

खुशिया चाचा पिछले दिनों गाँव में दिखाई नहीं दिया | पूछने पर पता चला कि चाचा तो कानेडा की सैर को निकले हुएँ हैं | कल ही मुलाकात हुई | मुझे देखते ही बोले , " आ भतीज....कब का वेट्दा (wait ) हूँ तुझे | भई मैं कनेडा  विज्टन  (visit ) गया था ...वहाँ का हाल- चाल भी तो तुझे  टेलना (tell ) था |
चाचा की बात सुनकर ....अपनी हँसी को बड़ी मुश्किल से रोकते हुए मैंने कहा , " वाह रे चाचा ..आपने तो खूब इंग्लिश बोलना सीख लिया है | " अभी मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि चाचा  बीच में ही बोल पड़े , " भतीज ...इस में सरपराइज़ने  (surprise ) वाली बात नहीं है ...वहाँ जाकर सभी ऐसा बोलने लगते हैं ..और तुझे तो पता ही है कि मैं इंग्लिश थोड़ी - बहुत स्पीकदा (speak) तो हूँ मगर मुझे रीडना (read) और राईटना  (write) नहीं आता |
मैंने अपनी हँसी पर काबू डालते फिर पूछा , " और कहो चाचा ...फिर कैसा लगा कानेडा ?"
" भई भतीज ...कानेडा तो वैरी गुड या ....रोडां (roads)  दी तां बात ही न पूछ...शीशे कि तरह शाईनदीयाँ  (shine) ने | जब शाम को वाकने (walk) निकलो तो वहाँ तो पीपल (people) ही पीपल दिखाई पड़ते हैं आपको | बिग -बिग म्कांज के बिग बिग जाडज़ (yards) ....जाड़ों में वो हार्ट टचदे (touch)   फूलों का नजारा....भई मैंने तो नटूरे (nature) का असली नजारा वहाँ ही लुकिया (look)  है | 
" चाचा ...आप वहाँ किसके पास रुके थे ? " मैंने फिर पूछा ....ता जो चाचा बीच में थोड़ी साँस ले सकें | " भतीज वहाँ मैं आपने गाँव वाले के . के. के पास रुका था | " के . के. ??? मैंने सवालिया नजरों से चाचा की ओर देखा ..क्यों जो वह मुझे बोलने या पूछने का मौका कम ही देते थे | " केवल क्रिशन ....वहाँ सभी उसे के.के. ही बुलाते हैं| 
भई उसका पोता  ....तोबा -तोबा ...नाक में दम कर  रखता है ...न ढंग से  ईटदा (eat)....न स्लीप्दा (speak)   ...बस  वीपदा ही वीपदा (weap)  है |
ले  और सुन .....एक दिन मैं और के.के. सैर करने निकले | रास्ते में के.के.का एक गोरा दोस्त मिल गया ...देखकर कहने लगा , " हाओ  आर या ?(how are ya ?)  हाओ आर यू गोइंग ? (how are you going ?)" मुझे लगा उसे मेरा नाम सपीकने(speak )में मुश्किल आ रही है और वह मेरे जाने के बारे में पूछ रहा है | मैंने तुरंत उत्तर दिया ,"मी नो आरया ....मी खुसिया ...हैपीया .....गोइंग बाए  कार ....एयर पोर्ट ....इण्डिया बाए जहाज्स |
उस गोरे को मेरे टाकने (talk ) का पता चला या नहीं ..वह तो सिर खुजलाता चला गया | बाद में मुझे के.के.ने बताया कि वह तो हमारा हाल-चाल पूछ रहा था ..तुम्हारा नाम या जाने के बारे में नहीं |
" भई भतीज ...यह गोरे भी कमाल करते हैं ...हिंदी -पंजाबी तो दूर की बात ...इंग्लिश भी ढंग से नहीं बोलते ...'गर सवाल ही गलत आस्कनगे (ask)  ...तो बन्दा सही जवाब भला कैसे टेलेगा(tell )? "

  हरदीप