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Wednesday, June 1, 2011

चाचा खुशिया गया कानेडा

खुशिया चाचा पिछले दिनों गाँव में दिखाई नहीं दिया | पूछने पर पता चला कि चाचा तो कानेडा की सैर को निकले हुएँ हैं | कल ही मुलाकात हुई | मुझे देखते ही बोले , " आ भतीज....कब का वेट्दा (wait ) हूँ तुझे | भई मैं कनेडा  विज्टन  (visit ) गया था ...वहाँ का हाल- चाल भी तो तुझे  टेलना (tell ) था |
चाचा की बात सुनकर ....अपनी हँसी को बड़ी मुश्किल से रोकते हुए मैंने कहा , " वाह रे चाचा ..आपने तो खूब इंग्लिश बोलना सीख लिया है | " अभी मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि चाचा  बीच में ही बोल पड़े , " भतीज ...इस में सरपराइज़ने  (surprise ) वाली बात नहीं है ...वहाँ जाकर सभी ऐसा बोलने लगते हैं ..और तुझे तो पता ही है कि मैं इंग्लिश थोड़ी - बहुत स्पीकदा (speak) तो हूँ मगर मुझे रीडना (read) और राईटना  (write) नहीं आता |
मैंने अपनी हँसी पर काबू डालते फिर पूछा , " और कहो चाचा ...फिर कैसा लगा कानेडा ?"
" भई भतीज ...कानेडा तो वैरी गुड या ....रोडां (roads)  दी तां बात ही न पूछ...शीशे कि तरह शाईनदीयाँ  (shine) ने | जब शाम को वाकने (walk) निकलो तो वहाँ तो पीपल (people) ही पीपल दिखाई पड़ते हैं आपको | बिग -बिग म्कांज के बिग बिग जाडज़ (yards) ....जाड़ों में वो हार्ट टचदे (touch)   फूलों का नजारा....भई मैंने तो नटूरे (nature) का असली नजारा वहाँ ही लुकिया (look)  है | 
" चाचा ...आप वहाँ किसके पास रुके थे ? " मैंने फिर पूछा ....ता जो चाचा बीच में थोड़ी साँस ले सकें | " भतीज वहाँ मैं आपने गाँव वाले के . के. के पास रुका था | " के . के. ??? मैंने सवालिया नजरों से चाचा की ओर देखा ..क्यों जो वह मुझे बोलने या पूछने का मौका कम ही देते थे | " केवल क्रिशन ....वहाँ सभी उसे के.के. ही बुलाते हैं| 
भई उसका पोता  ....तोबा -तोबा ...नाक में दम कर  रखता है ...न ढंग से  ईटदा (eat)....न स्लीप्दा (speak)   ...बस  वीपदा ही वीपदा (weap)  है |
ले  और सुन .....एक दिन मैं और के.के. सैर करने निकले | रास्ते में के.के.का एक गोरा दोस्त मिल गया ...देखकर कहने लगा , " हाओ  आर या ?(how are ya ?)  हाओ आर यू गोइंग ? (how are you going ?)" मुझे लगा उसे मेरा नाम सपीकने(speak )में मुश्किल आ रही है और वह मेरे जाने के बारे में पूछ रहा है | मैंने तुरंत उत्तर दिया ,"मी नो आरया ....मी खुसिया ...हैपीया .....गोइंग बाए  कार ....एयर पोर्ट ....इण्डिया बाए जहाज्स |
उस गोरे को मेरे टाकने (talk ) का पता चला या नहीं ..वह तो सिर खुजलाता चला गया | बाद में मुझे के.के.ने बताया कि वह तो हमारा हाल-चाल पूछ रहा था ..तुम्हारा नाम या जाने के बारे में नहीं |
" भई भतीज ...यह गोरे भी कमाल करते हैं ...हिंदी -पंजाबी तो दूर की बात ...इंग्लिश भी ढंग से नहीं बोलते ...'गर सवाल ही गलत आस्कनगे (ask)  ...तो बन्दा सही जवाब भला कैसे टेलेगा(tell )? "

  हरदीप 



7 comments:

सहज साहित्य said...

हरदीप जी खुशिया चाचा तो सारी उदासी पल भर में दूर कर देते हैं, शायद इसी लिए उनका नाम खुशिया है । मन का ज़ायका बदलने के लिए इस तरह के प्रसंग भी महत्त्वपूर्ण हैं। बहुत साधुवाद !

वन्दना said...

सही बात जब प्रश्न ही गलत होगा तो उत्तर तो गलत ही होगा ना……बहुत मज़ेदार्।

Udan Tashtari said...

पहले पता चल जाता कि खुशिया चाचा आ रहे हैं तो ब्लॉगर मीट ही कर लेते उनसे. :)

मस्त!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):) मजेदार

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वेर्र फन्नी गल-बात हो गयी ये तो जी।

Dilbag Virk said...

sunder

Rachana said...

are wah kya likha hai haste haste ped me bal pad gaye .
dhnyavad
rachana