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Thursday, July 28, 2011

मेरी गुड़िया


Monday, July 25, 2011

फूल-गुलाब !


{फूल  -हाइकु}
१.
फूलों के संग
रहती है खुशबू
मेरे संग तू !
२.
हर सुबह
ओस से मुँह धोए 
फूल गुलाब !
३.
ओस मुस्काई 
बैठ फूल पंखुरी 
बिखरी छटा !
४.
खिला गुलाब 
खुशबू व् पंखरी 
यहाँ बिखरीं !

**********
{खुशबू -ताँका}

दिखे कभी न 
यूँ खुशबू मगर
ले फूल चला 
मेरे संग जो आया 
तेरी यादों का मेला 

हरदीप 


Friday, July 22, 2011

रब करे गलतियाँ ( चोका )












रौब हमारा 
किसी पे न चलता 
रौब तो बस
यूँ  रब पर चलता 
रब्बा देख ले 
अगर हुई कुछ 
ऊँच- नीच तो  
फिर देखना तुम ...
जब कभी भी 
कुछ गलत होता 
या फिर कभी 
जान से प्यारा कोई 
बिछुड़ जाता 
रब पे बहुत गुस्सा 
तो हमें आता
रब पर लगाके 
सारे यूँ दोष 
मुक्त हम हो जाते 
क्यों जो हमेशा 
सही ही हम करें 
क्यों फिर भरें  
गलतियाँ तो सारी 
वो रब ही करता !

हरदीप 

Wednesday, July 20, 2011

लारा लप्पा











लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे
ज़िन्दगी  नू गाहां* ही पाई रखदे  
वकत नू थोड़ा जिहा टपाई रखदे
वकत नू वखतां* ‘च पाई रखदे
दुनीआं नू ऐवें ही नचाई रखदे
झूठी जिही आस बनाई रखदे
कल नू अज ही बनाई रखदे
झूठ  नू सच ही बनाई रखदे 
भोल़े-भाल़े लोकां नू उल़झाई रखदे
लोकां नू खहिड़े* जिहे पाई रखदे
कदमां ‘च उडीक* नू विछाई रखदे
नैणा ‘च सुपने सजाई रखदे 
लारा ला के उमरां टपाई* रखदे
लारा लप्पा  लारा लप्पा  लाई रखदे !
 
गाहां-आगे  वखतां-मुश्किल   आस-आशा 

खहिड़े-मगर लगाना     उडीक-इंतजार  टपाई- बीत जाना





हरदीप


Saturday, July 16, 2011

मन के आँसू [ताँका]

                                                               

    [1]
भीगी पलकें
टप-टप टपके
मन के आँसू
ये दर्द में तिरता
दिल बहुत रोया !


   [2]
झूठ नहीं ये
ओ सनम बेवफ़ा
बोलते आँसू
तोड़कर संयम
सिर्फ एक ही भाषा !
    [3]
आँसू में होती
सागर से गहरी
संवेदनाएँ
पावनता इनकी
डूबकर ही जानूँ !
    
      [4]
आँसू तुम्हारे
याद बन बहते 
यूँ खोना नहीं
ये बन गए मोती 
बहुत अनमोल !

Sunday, July 10, 2011

स्वर्ग-का-फूल-गुलमोहर

{गुलमोहर - चोका}*
गुलमोहर 
है राज-आभरण**
स्वर्ग-का-फूल***
फर्न जैसी पत्तियाँ
झिलमिलाती
बड़े गुच्छों में फूल 
फूलों से सजा 
ये दिखता है जैसे 
हो दावानल !
दहकते हैं फूल 
आग के जैसे
सहते हैं जब ये 
सूर्य का ताप
वो फूलों का दुशाला 
लाल-नारंगी 
ओढ़कर सहता 
भीषण गर्मी 
दे आँखों को ठंडक 
आए शबाब 
यूँ गर्मी में निखार
पेड़ों पर बहार !
 *[चोका=जापानी लम्बी कविता, जिसमें 5+7……के क्रम में कविता लिखी जाती है और अंत में एक ताँका [5+7-5+7+7] जोड़ दिया जाता है ।
**संस्कृत में इसका नाम 'राज-आभरणहैजिसका अर्थ राजसी आभूषणों से सजा हुआ वृक्ष है।
***फ्रांसीसियों ने गुलमोहर को 'स्वर्ग का फूल'  नाम दिया है!

हरदीप 

Tuesday, July 5, 2011

गाँव वो मेरा-हाइकु गीत


1.
गाँव जाकर
मुझे मिला ही नहीं
गाँव जो मेरा !
2.
बहुत ढूंढा
दिल में जो बसता
वो गाँव मेरा !

3.
न जाने कहाँ
मुर्गे की बांग वाला
गुम सवेरा!
4.
नीम के झूले
ठण्डी - छैंया फुदके
पाखी का डेरा!
5.
बूँद -  बूँद को           
तरसा अब प्यासा
मटका तेरा !
6.
कहीं न मिलें
पीपल नीचे बाबा
जमाते डेरा !
7.
दादी पूछती
कहाँ फैंक दिया रे
चरखा मेरा!
8.
कुँए का पानी 
शक्कर से भी मीठा 
गाँव वो  मेरा !

9.
कली करने
पीतल के बर्तन
आए ठठेरा !
10.
दाना चुगती                              
फिर चीं चीं चिड़िया
करे बसेरा
11.

सूना आँगन
चाहता फिर यहाँ 
डाले तू फेरा ! 
.
12.
लौटकर आ
पुकारे तुझे अब
गाँव वो तेरा !

हरदीप