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Wednesday, July 20, 2011

लारा लप्पा











लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे
ज़िन्दगी  नू गाहां* ही पाई रखदे  
वकत नू थोड़ा जिहा टपाई रखदे
वकत नू वखतां* ‘च पाई रखदे
दुनीआं नू ऐवें ही नचाई रखदे
झूठी जिही आस बनाई रखदे
कल नू अज ही बनाई रखदे
झूठ  नू सच ही बनाई रखदे 
भोल़े-भाल़े लोकां नू उल़झाई रखदे
लोकां नू खहिड़े* जिहे पाई रखदे
कदमां ‘च उडीक* नू विछाई रखदे
नैणा ‘च सुपने सजाई रखदे 
लारा ला के उमरां टपाई* रखदे
लारा लप्पा  लारा लप्पा  लाई रखदे !
 
गाहां-आगे  वखतां-मुश्किल   आस-आशा 

खहिड़े-मगर लगाना     उडीक-इंतजार  टपाई- बीत जाना





हरदीप


11 comments:

दीनदयाल शर्मा said...

डॉ. हरदीप जी..बहुत ही सुन्दर गीत...बधाई.. कई दिनों से में आपके ब्लॉग पर नहीं आया..मुझे यूं लगा मानो आप मुझे कह रही हो कि ....लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे....

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िता गीत बन गया.

kshama said...

Sundar geet rach gaya!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

बहुत सुंदर शब्‍द चयन।

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बेहतर लेखन की ‘अनवरत’ प्रस्‍तुति।
अब आप अल्‍पना वर्मा से विज्ञान समाचार सुनिए..

ktheLeo said...

लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे !
मज़ेदार!

शिखा कौशिक said...

बहुत khoob हरदीप जी .बधाई

Rakesh Kumar said...

लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे !

बहुत सुन्दर गीत.पंजाबी कम आती है,फिर भी कुछ कुछ समझ में आ रहा है.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

मेरे ब्लॉग पर आपके आने का बहुत बहुत धन्यवाद.
एक बार फिर से आईयेगा.नई पोस्ट जारी की है.

सहज साहित्य said...

बचपन में गीत की यह पंक्ति बहुत सुनते थे-"लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे"- आपने इसमें कुछ नया जोड़ दिया है । आपकी ये पंक्तियां बहुत खूबसूरत बन गई हैं - कदमां ‘च उडीक* नू विछाई रखदे
नैणा ‘च सुपने सजाई रखदे
लारा ला के उमरां टपाई* रखदे

Dr (Miss) Sharad Singh said...

लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदे
ज़िन्दगी नू गाहां* ही पाई रखदे
वकत नू थोड़ा जिहा टपाई रखदे
वकत नू वखतां* ‘च पाई रखदे

बहुत ही सुन्दर गीत...मर्मस्पर्शी ...

Mukesh Kumar Sinha said...

:)....
pyara sa geet
ab bas isko sangeet ki jarurat hai:)

Dr Varsha Singh said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता के लिए हार्दिक बधाई।