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Friday, July 22, 2011

रब करे गलतियाँ ( चोका )












रौब हमारा 
किसी पे न चलता 
रौब तो बस
यूँ  रब पर चलता 
रब्बा देख ले 
अगर हुई कुछ 
ऊँच- नीच तो  
फिर देखना तुम ...
जब कभी भी 
कुछ गलत होता 
या फिर कभी 
जान से प्यारा कोई 
बिछुड़ जाता 
रब पे बहुत गुस्सा 
तो हमें आता
रब पर लगाके 
सारे यूँ दोष 
मुक्त हम हो जाते 
क्यों जो हमेशा 
सही ही हम करें 
क्यों फिर भरें  
गलतियाँ तो सारी 
वो रब ही करता !

हरदीप 

15 comments:

Ravi Rajbhar said...

Solah ane sach kaha hi apne...!

सहज साहित्य said...

रब सबकी बकवास सुन लेता है और मुस्करा देता है । यही कारण है कि हम अपने कर्मों का खोट नहीं देखते रब की ही कमी तलाश करते हैं । आपने सही बात कही है ।

Kailash C Sharma said...

बहुत खूब ! बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

इंसान का कहीं और वश भी तो नहीं चलता .. ईश्वर से ही सब कुछ कह देता है ..अच्छी प्रस्तुति

रविकर said...

बढ़ी बढ़िया प्रस्तुति ||

Udan Tashtari said...

रब ही तो मौका देता है कि हम सब उस पर थोप दें...:)

बढ़िया रचना.

Dilbag Virk said...

DOSH DOOSRON KE SIR MADHNA TO AADMI KI AADAT THAHRI

SUNDER RACHNA

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' said...

वाह!

Dr (Miss) Sharad Singh said...

रब पर लगाके
सारे यूँ दोष
मुक्त हम हो जाते
क्यों जो हमेशा
सही ही हम करें
क्यों फिर भरें
गलतियाँ तो सारी
वो रब ही करता !

बिलकुल यही मनोदशा रहती है इंसान की. यथार्थपरक सुन्दर संवेदनशील रचना...

Rakesh Kumar said...

आपकी यह बात भी तो रब ही जाने,हरदीप जी.
सुन्दर प्रस्तुति की है आपने.
मेरे ब्लॉग पर आप आयीं ,इसके लिए आभारी हूँ आपका.

Bhushan said...

सही तो है. जब सब कुछ रब ही करता है तो गलतियाँ भी तो रब ही करता है न. सही उलाहना और शिकायत.

ऋता शेखर 'मधु' said...

बहुत सुन्दर रचना है,बधाई|

रब ने लिखी
तक़दीर हमारी
ग़म देते हैं
खुशी भी देते वही
सुख में हम
खुश तो हो लेते हैं
दु:ख में उन्हें
शिकवे भेजते हैं
ये रब की किस्मत

सादर
ऋता

जयकृष्ण राय तुषार said...

सार्थक सृजन बधाई और शुभकामनायें |

जयकृष्ण राय तुषार said...

सार्थक सृजन बधाई और शुभकामनायें |

संजय भास्कर said...

सुन्दर संवेदनशील रचना...