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Monday, July 25, 2011

फूल-गुलाब !


{फूल  -हाइकु}
१.
फूलों के संग
रहती है खुशबू
मेरे संग तू !
२.
हर सुबह
ओस से मुँह धोए 
फूल गुलाब !
३.
ओस मुस्काई 
बैठ फूल पंखुरी 
बिखरी छटा !
४.
खिला गुलाब 
खुशबू व् पंखरी 
यहाँ बिखरीं !

**********
{खुशबू -ताँका}

दिखे कभी न 
यूँ खुशबू मगर
ले फूल चला 
मेरे संग जो आया 
तेरी यादों का मेला 

हरदीप 


10 comments:

संजय भास्कर said...

डॉ. हरदीप संधु जी
दिल को छू गई..आप की अभिव्यक्ति...सुन्दर ..आभार..

संजय भास्कर said...

सभी क्षणिकाएं बहुत अच्छी लगीं । मेरी शुभकामनाएँ ।

Bhushan said...

बहुत ही सुंदर हाइकु.-
हर सुबह
ओस से मुँह धोए
फूल गुलाब !-
यह तो एकदम फ्रेश बिंब रहा.

सहज साहित्य said...

सभी हाइकु बहुत प्रभावशाली हैं । तांका भी बहुत मर्मस्पर्शी है ।

Dilbag Virk said...

sunder taanka
haaiku ek se badhkar ek

वीना said...

सुंदर हाइकु...

kshama said...

दिखे कभी न
यूँ खुशबू मगर
ले फूल चला
मेरे संग जो आया
तेरी यादों का मेला
Bahut sundar rachnayen!

Udan Tashtari said...

सुन्दर रचनायें.....बधाई.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

गुलाब से महकते खूबसूरत हायकूज़.....

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुन्दर!