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Saturday, August 13, 2011

रक्षा बन्धन


राखी { ताँका }

मन त्रिंजण*
यूँ काते प्रतिदिन 
मोह के धागे
राखी दिन बहना
भाई कलाई बाँधे


* पंजाब की लोक - संस्कृति में चर्खे का विशेष स्थान रहा है | एक ज़माना था जब अविवाहित लड़कियाँ मिलकर चर्खा काता करती थीं | समूहिक रूप से चर्खा कातने वाली लड़कियों की टोली को  त्रिंजण कहा जथा था | 

14 comments:

वन्दना said...

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं.

udaya veer singh said...

Beautiful gesture of sacred document
of pious contract ..../ RAKSHABANDHAN
ki shubhkamnayen ji

सहज साहित्य said...

इस पावन हाइगा के लिए बहुत बधाई । त्रिंजण का बहुत सार्थक प्रयोग किया गया है । पश्चिमी यू पी में इसे तीजन कहा जाता है -समूह में मिल -बैठकर कातना । एक आध्यात्मिक अर्थ भी स्वत: आ गया है ।

Kailash C Sharma said...

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं !

Udan Tashtari said...

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं.

Dilbag Virk said...

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं.

kshama said...

Rakshabandhan aur 15 August kee anek shubh kamnayen!

Rakesh Kumar said...

सुन्दर भाव,उत्तम प्रस्तुति.

रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

त्रिजण के बारे में सहज साहित्य जी द्वारा जानकारी देने के लिए उन्हें भी बधाई.
इसका अर्थ यदि आप भी स्पष्ट करें तो आभारी हूँगा.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर भाव ..शुभकामनायें

सहज साहित्य said...

आपका आध्यात्मिक ताँका भी अपनी सहजता के कारण यादगार बन गया है ।

smshindi By Sonu said...

रक्षाबंधन और स्वंतत्रता दिवस पर ढेर सारी शुभकामनायें.

smshindi By Sonu said...

रक्षाबंधन और स्वंतत्रता दिवस पर ढेर सारी शुभकामनायें.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

खूब....बहुत ही उम्दा प्रस्तुति...

रक्षाबंधन और स्वंतत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और ढेर सारी बधाईयां