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Wednesday, September 28, 2011

उदास आँखें


न जाने क्यों 
उदासी के बादल
मन में छाए 

ढूँढ़ न पाया 
लाख यतन किए 
कोई उपाय 


उदास आँखें 
फूल-पँखुरियों में
ढूंढें सुकून 


कैसी उदासी 
तन्हाई के बादल
भीगी जुदाई 


खुश्क हैं आँखें 
जज्बात सागर में 
उठा तूफ़ान


हरदीप 


Wednesday, September 21, 2011

अकेला रही {चोका }




ओ मेरे मन 
तुझे लगता है तू 
अकेला राही
इस जग त्रिंजण 
मगर ऐसा 
होता नहीं पगले 
कोई न कोई 
बैठा मन त्रिंजण 
बिन बोले ही 
पढ़ता है तुझको 
दिल तरंगें 
ज्यों उसके भावों की 
आ मिलती हैं 
तेरे ह्रदय उठीं 
शोर मचाती 
ख़ामोशी की लहरें 
खुद -ब-खुद 
चेहरे पे बिखरे 
सुकून की चाँदनी!
  
हरदीप 

Saturday, September 17, 2011

"तेरे बिना जिया लागे ना"


1.
पहाड़ बनी
तुम बिन जिन्दगी
जीना मुश्किल
2.
भूल न पाई
जब-जब साँस ली 
तू याद आया !
3.
दिल के आँसू 
दामन  न भिगोएँ 
दिल पे गिरें
4.
दूर तू गया
अँखियों में सावन
बसने लगा
5.
जी -जी के मरें
मर-मर के जिएँ
बिन आपके
6.
तुम जो गए
दिल में बिछोड़े का
तपे तंदूर 
7.
तुम क्या गए
ले गए हँसी मेरी
अपने साथ
8.
तुम्हारी याद
बनी ऐसा मौसम
बदले न जो
9.
मन चाहता-
मेरी सूनी राहों का 
कोई हो साथी
10.
तू बसा है
खुशबू की तरह
मेरे दिल में
11.
फूलों के अंग 
खुशबू ज्यों रहती
तू मेरे संग 
12.
तू जुदा कैसे 
लहू बन दौड़ती 
तेरी ख्वाहिश 
13.
तुझ में दिखे
मुझे मेरी तस्वीर
तू मेरे जैसा 
14.
जब हो दर्द 
बस एक चाहिए
तुम्हारा स्पर्श 
15.
जब मैं हुई 
तेरे दर्द में फ़ना
तू मुझे मिला

-- डॉ. हरदीप कौर सन्धु 

Tuesday, September 6, 2011

रुनझुन पायल -ताँका

                                                    
1 .                                                    टपकी बूँदे                                                         
रुनझुन पायल
मन में बाजे
तन है पुलकित
मन है प्रमुदित


2
मन - त्रिंजण
छम-छम बरसा
मिलने आईं
यूँ यादें बन बूँदें
शीतल सुधियों से


3
जब भी कोई
न पास होता मेरे
अकेला मन
क्यों ढूँढ़ता संदेसे
पागल हवाओं में


- डॉ. हरदीप कौर सन्धु