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Saturday, September 17, 2011

"तेरे बिना जिया लागे ना"


1.
पहाड़ बनी
तुम बिन जिन्दगी
जीना मुश्किल
2.
भूल न पाई
जब-जब साँस ली 
तू याद आया !
3.
दिल के आँसू 
दामन  न भिगोएँ 
दिल पे गिरें
4.
दूर तू गया
अँखियों में सावन
बसने लगा
5.
जी -जी के मरें
मर-मर के जिएँ
बिन आपके
6.
तुम जो गए
दिल में बिछोड़े का
तपे तंदूर 
7.
तुम क्या गए
ले गए हँसी मेरी
अपने साथ
8.
तुम्हारी याद
बनी ऐसा मौसम
बदले न जो
9.
मन चाहता-
मेरी सूनी राहों का 
कोई हो साथी
10.
तू बसा है
खुशबू की तरह
मेरे दिल में
11.
फूलों के अंग 
खुशबू ज्यों रहती
तू मेरे संग 
12.
तू जुदा कैसे 
लहू बन दौड़ती 
तेरी ख्वाहिश 
13.
तुझ में दिखे
मुझे मेरी तस्वीर
तू मेरे जैसा 
14.
जब हो दर्द 
बस एक चाहिए
तुम्हारा स्पर्श 
15.
जब मैं हुई 
तेरे दर्द में फ़ना
तू मुझे मिला

-- डॉ. हरदीप कौर सन्धु 

11 comments:

Udan Tashtari said...

सुन्दर हाईकु!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत हाईकू रचनाएँ

रविकर said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||

आपको हमारी ओर से

सादर बधाई ||

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

ktheLeo said...

गजब!

udaya veer singh said...

मर्म -स्पर्शी काव्यांश बहुत संदर हैं ...... शक्रिया जी /

सहज साहित्य said...

हरदीप जी किस हाइकु की प्रशंसा करूँ? प्रत्येक हाइकु जैसे अमृत -कलश हो । कोO किसी से कम नहीं । प्रेम के संयोग और विप्रलम्भ ( वियोग) का अद्भुत मिश्रण । एक -एक श्ब्द हृदय की गहराइयों से निकला है और पाठक के हृदय को रससिक्त कर देता है । हाइकु का ही नही काव्य का उत्कृष्ट नमूना हैं ये हाइकु। इन हाइकु को बार -बार पढ़कर भी मन नहीं भर अर्हा है। हिन्दी स्साहित्य के इतिहास में इस तरह के हाइकु सदा याद किए जाएंगे । हरदीप का हिन्दी काव्य -जगत में आगमन डॉ सुधा गुप्ता , डॉ भावना कुँअर की रससिक्त परम्परा को और आगे पढ़ाने में सक्षम है 9.
मन चाहता-
मेरी सूनी राहों का
कोई हो साथी
10.
तू बसा है
खुशबू की तरह
मेरे दिल में
11.
फूलों के अंग
खुशबू ज्यों रहती
तू मेरे संग
12.
तू जुदा कैसे
लहू बन दौड़ती
तेरी ख्वाहिश
13.
तुझ में दिखे
मुझे मेरी तस्वीर
तू मेरे जैसा
14.
जब हो दर्द
बस एक चाहिए
तुम्हारा स्पर्श इन हाइकुओं का सौन्दर्य किसके मन में घर नहीं कर लेगा?स्नेहाशीश के साथ मेरे हृदय की सारी शुभकामनाएँ इस अनुपम रचना के लिए ! रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

ऋता शेखर 'मधु' said...

मर्मस्पशी...ह्रदय की वेदना लेखनी से साफ प्रकट हो रही है...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर हाईकू....
सादर...

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत हाईकू....

Bhushan said...

सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे. यह बहुत अच्छा लगा-
दिल के आँसू
दामन न भिगोएँ
दिल पे गिरें

सुंदर सृजन.