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Tuesday, September 6, 2011

रुनझुन पायल -ताँका

                                                    
1 .                                                    टपकी बूँदे                                                         
रुनझुन पायल
मन में बाजे
तन है पुलकित
मन है प्रमुदित


2
मन - त्रिंजण
छम-छम बरसा
मिलने आईं
यूँ यादें बन बूँदें
शीतल सुधियों से


3
जब भी कोई
न पास होता मेरे
अकेला मन
क्यों ढूँढ़ता संदेसे
पागल हवाओं में


- डॉ. हरदीप कौर सन्धु

16 comments:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन क्षणिकायें...

sushma 'आहुति' said...

सुन्दर क्षणिकायें. ....

udaya veer singh said...

सोणे हाईकू ,संजीदा कोशिश सम्माननीय......बधाईयाँ जी

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर...बधाई

रविकर said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ||

सादर बधाई ||

Bhushan said...

सुंदर ताँके. आखिरी वाला बहुत अच्छा लगा.

सहज साहित्य said...

बहुत सुन्दर ताँका ( हाइकु या क्षणिका नही, क्योंकि हाइकु 5+7+5=17 वर्ण की तीन पंक्तियों का होता है और क्षणीका में वर्ण संख्या या पंक्तियों का बन्धन नहीं है । ताँका 5+7+5+7+7=31 वर्ण और पाँच पंक्तियों का होता है) ।पहले दो ताँकाओं में ध्वनिबिम्ब का गहरा संयोजन है । लगता है हर पंक्ति घुँघरू की तरह बज रही है-
1-टपकी बूँदें

रुनझुन पायल
मन में बाजे
तन है पुलकित
मन है प्रमुदित
2
मन - त्रिंजण
छम-छम बरसा
मिलने आईं
यूँ यादें बन बूँदें
शीतल सुधियों से
और तीसरे ताँका में सन्देसे ढूँढ़ने की व्याकुलता का मार्मिक वर्णन है । ये ताँका हिन्दी जगत की निधि बनेंगे, मेरा सुदृढ़ विश्वास है ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर ताकां ...

वन्दना said...

बहुत सुन्दर ताकां

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर ताँके| बधाई|

Kailash C Sharma said...

जब भी कोई
न पास होता मेरे
अकेला मन
क्यों ढूँढ़ता संदेसे
पागल हवाओं में

... लाजवाब .... सभी क्षणिकाएं बहुत सुंदर।

kshama said...

3
जब भी कोई
न पास होता मेरे
अकेला मन
क्यों ढूँढ़ता संदेसे
पागल हवाओं में
Sbhee kshanikayen behtareen hain,par ye bahut hee achhee lagee!

ktheLeo said...

वाह!

अरूण साथी said...

sundar

Dilbag Virk said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-631,चर्चाकार --- दिलबाग विर्क

डॉ. जेन्नी शबनम said...

sabhi taanka bahut sundar, badhai sweekaaren.