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Wednesday, September 28, 2011

उदास आँखें


न जाने क्यों 
उदासी के बादल
मन में छाए 

ढूँढ़ न पाया 
लाख यतन किए 
कोई उपाय 


उदास आँखें 
फूल-पँखुरियों में
ढूंढें सुकून 


कैसी उदासी 
तन्हाई के बादल
भीगी जुदाई 


खुश्क हैं आँखें 
जज्बात सागर में 
उठा तूफ़ान


हरदीप 


11 comments:

डॉ टी एस दराल said...

वाह ! उदासी पर भी बढ़िया हाइकु लिखे हैं ।

Bhushan said...

सभी हाइकु अच्छे लगे. लेकिन इस की छटाएँ कई हैं-
कैसी उदासी
तन्हाई के बादल
भीगी जुदाई
MEGHnet

kshama said...

उदास आँखें
फूल-पँखुरियों में
ढूंढें सुकून
Bada hee komal ehsaas hai!
Navratree kee anek shubh kamnayen!

रविकर said...

खूबसूरत प्रस्तुति ||
http://dcgpthravikar.blogspot.com/2011/09/blog-post_26.html

Rakesh Kumar said...

हरदीप जी आपके सभी हाइकू बेमिशाल हैं.
शब्दों के उजाले में उदासी का सुन्दर
बयान करते हुए.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
आपका इंतजार है.

सहज साहित्य said...

उदासी के गहरे और मार्मिक चित्र मन-प्राण को आर्द्र कर देते हैं हाइकु विधा को जनमानस के नज़दीक लाने में डॉ हरदीप सन्धु का प्रयास डो भावना की तरह हिन्दी- जगत के लिए गौरव का विषय है.ये हाइकु मन को तरंगित कर देते हैं-उदास आँखें
फूल-पँखुरियों में
ढूंढें सुकून

XX

कैसी उदासी
तन्हाई के बादल
भीगी जुदाई

ਸੁਰਜੀਤ said...

Very nice Hardeep ji.

चन्दन..... said...

कुछ ही शब्दों में बहुत गहरे अर्थ ...

वन्दना said...

गहरे अर्थ लिये सुन्दर हाइकू।

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-652 , चर्चाकार-दिलबाग विर्क

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्दर अभिव्यक्ति