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Saturday, October 1, 2011

हरदीप सन्धु के हाइकु

 गर्भनाल  हिन्दीं की नेट   पत्रिका  अपने विश्वस्तरीय   साहित्यिक सफर के पांच वर्ष पूरे करने वाली है .अब यह पत्रिका मुद्रित रूप में भी उपलब्ध है .इस पत्रिका ने भारतीय और प्रवासी साहित्यकारों को तो जोडा   ही है ,साथ ही साथ हिन्दी की नव्य विधाओं -हाइकु और लघुकथा को भी प्रोत्साहित किया है.चंदनमन( हाइकु -संग्रह -सम्पादक:रामेश्वर काम्बोज  व डा भावना ) की समीक्षा व काम्बोज जी के हाइकु पूर्व अंकों में दिए  जा चुके हैं .  इसके अक्तूबर  अंक में प्रकाशित हरदीप सन्धु के नए अंदाज़ के  हाइकु पढने  के लिए चित्र पर क्लिक कीजिएगा. 

9 comments:

Gulshan Dayal said...

Thanks a lot for sharing these Haikus....

Gulshan Dayal said...

some of these are really touching.....

वर्ज्य नारी स्वर said...

सुन्दर लिखा है.

Bhushan said...

'गर्भ नाल' में छपने पर वधाइयाँ जी....वधाइयाँ.

रविकर said...

सुन्दर प्रस्तुति ||
आभार महोदया ||

सहज साहित्य said...

जीवन की खुशबू से भरे हैं हरदीप जी के सारे हाइकु !

दिलबाग विर्क said...

खूबसूरत हाइकु
ग़ज़ल,पसंद आए तो LIKE करें

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर हाईकू रचनाएं...
सादर बधाई...

ऋता शेखर 'मधु' said...

sabhi haiku bahut hi sunder...badhai