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Monday, December 19, 2011

पंजाबी लोकगीत: धड़कते दिल का आईना

कृपया पूरा अंक पढ़ने के लिए गर्भनाल पर क्लिक कीजिए






5 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

भई वाह! गज़ब
बस
कस्म गोया तेरी खायी न गयी

सहज साहित्य said...

लोक गीत विलुप्त होते जा रहे हैं । ऐसे अवसर पर हर दीप जी का यह लेख जन जागरण के लिए प्रेरणा दे रहा है । विदेश में रहने पर भी आपका भारत की माटी से गहरा जुड़ाव पूरे लेख में उजागर हुआ है । ढेर सारी बधाई हरदीप जी

Rachana said...

log geeton ki mithan gud se bhi jyada hoti hai .aapka lekh bahut hi sargarbhit hai.
aapko badhai
rachana

Dr.Bhawna said...

Bahut achchha laga aapka aalekh...bahut2 badhai...

अमिता कौंडल said...

हरदीप जी इन लोकगीतों को पढ़कर मन खुश हो गया यह पंजाबी लोकगीत कला कभी लुप्त नहीं हो सकती कितने ही पंजाबी गायकों ने इसे सहेज कर रखा है. मैं तो अपने साथ कितने ही इन लोकगीतों को प्रकाश कौर जी, सुरिंदर कौर जी और उन जैसे गायकों की आवाज़ में ले आयी हूँ जब भी मन व्याकुल होता सुन कर सकून पा लेती हूँ आज आपका यह लेख पढ़ व्ही सकून मिला है.
इस सुंदर प्रस्तुती के लिए धन्यवाद व् बधाई .
सादर,
अमिता कौंडल