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Monday, February 13, 2012

बन्द किताब



1 .
बन्द किताब 
लगे जो बन्द पड़ी 
खोलता इसे 
बेचैन मन मेरा
रोज़ ख्यालों में पढ़ी 
2 .
बन्द किताब 
कोई राज़ छुपाए 
सारे जहां से 
राज़ में जो है छुपा
वह दिल में बसा 
3 .
बन्द किताब 
खोलने से डरता 
ये मन मेरा
अपने ही घर ने 
कैदी मुझे बनाया 
4 .
बन्द किताब 
बनी एक सवाल 
शिकायत भी 
कोई ढूंढ़ न पाया 
सही जवाब अभी 
5 .
बन्द किताब 
ज्यों ला -इलाज मर्ज़ 
जिन्दगी कर्ज़ 
यूँ ही बढ़ता गया 
ज्यों हमने की दवा !
- डॉ. हरदीप कौर सन्धु  

6 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया!!

kshama said...

Wah! Bahut khoob!

सहज साहित्य said...

बन्द किताब -शीर्षक पर लिखे गए सभी ताँका गहन अनुभूति लिये हुए हैं।
बन्द किताब
खोलने से डरता
ये मन मेरा
अपने ही घर ने
कैदी मुझे बनाया
-किताब के व्याज से अतल गहराइयों को छू गया यह ताँका।पहले तांका में बन्द किताब को रोज़ ख्यालों में पढ़ना माधुर्य से पगा है- बन्द किताब
लगे जो बन्द पड़ी
खोलता इसे
बेचैन मन मेरा
रोज़ ख्यालों में पढ़ी

udaya veer singh said...

Right expression in right direction with right sentiments who make readable to unknown too .Very good .

दिलबाग विर्क said...

खूबसूरत तांका

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....