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Thursday, March 1, 2012

अविराम के जनवरी 2012 अंक में मेरे हाइकु

                                                       अविराम वेब पत्रिका का लिंक 



3 comments:

सहज साहित्य said...

डॉ हरदीप सन्धु जी के हाइकु बहुत अच्छे हैं। ये सभी हाइकुमर्मस्पर्शी हैं-
1.
हुई गलती
जीवन का किनारा
बन न पाया ।
2.
दिल जो टूटे
मरने मत देना
अपनी इच्छा ।
3.
दुख जो आता
जीवन को माँजता
आगे बढ़ाता ।
4.
काटता जाए
दुविधा की बेड़ियाँ
दृढ़ संकल्प

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत ही सुन्दर,शानदार और उम्दा प्रस्तुती!

आप सभी सम्माननीय दोस्तों एवं दोस्तों के सभी दोस्तों से निवेदन है कि एक ब्लॉग सबका
( सामूहिक ब्लॉग) से खुद भी जुड़ें और अपने मित्रों को भी जोड़ें... शुक्रिया

Dr.Bhawna said...

Aapko hardik badhai...sabhi haiku bahut khbsurat hain..