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Thursday, March 1, 2012

त्रिंजण और अनुभूति


अनुभूति वेब पत्रिका पर 27  फरवरी 2012  को मेरे कुछ हाइकु जिनको  मैंने त्रिंजण  में बाँधा है , प्रकाशित हुए हैं । त्रिंजण शब्द पंजाब की लोक संस्कृति से जुड़ा शब्द है। 
 यह संसार भी एक त्रिंजण  है........
 हमारा मन भावों का त्रिंजण है.....
आज मैं इसी जग त्रिंजण तथा मन त्रिंजण की बात अपने हाइकुओं में कहने जा रही हूँ। आशा है आपको यह प्रयास अच्छा लगेगा।




मन त्रिंजण
जीवन भाव काते
बने हाइकु

मन त्रिंजण
सदियों से बंजारा
घूमे आवारा

मन त्रिंजण
खुदा करे निवास
काहे का डर

मन त्रिंजण
ज्यों प्रभु लौ जगाए
शांति हो जाए

मन त्रिंजण
निचोड़े जो चाँदनी
पी नयनों से

ये मुलाकातें
मन त्रिंजण मेले
संदली रातें

त्रिंजण मन
लगा भावों का मेला
नहीं अकेला

भाग्य से हम
देखने आए यहाँ
जग -त्रिंजण

कात रे मन
जगत त्रिंजण में
मोह का धागा
१०
यह जीवन
जगत त्रिंजण का
खेल तमाशा
११
बाँट रे ज्ञान
संसार त्रिंजण में
कर तू दान
१२
जग त्रिंजण
नहीं जागीर तेरी
घड़ी का डेरा
१३
जग त्रिंजण
ये बाग़ वो जिसका
रब है माली
१४
जग त्रिंजण
अनजान नगरी
कहाँ ठिकाना
१५.
जग त्रिंजण
गिनती के हैं साँस
बेगाना धन

अनुभूति लिंक (२७ फरवरी २०१२)

इसी लिंक पर आदरणीय हिमांशु जी की ये टिप्पणी जिसके लिए मैं उनका तहे दिल से शुक्रिया करती हूँ .........
Comments: 'त्रिंजण'के माध्यम से डॉ सन्धु जी ने हाइकु जैसे छन्द में यह अभिनव प्रयोग किया है । हम अपने जिन लौकिक शब्दों और उसमें गुम्फित अर्थ को भूलते जा रहे है, उसे बी याद दिलाया गया है । हिन्दी क्षेत्र ( पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में यह शब्द 'तीजन' के रूप में गाँवों में बोला जाता रहा है । चर्खे का चलन बन्द हो गया तो शब्द भी गायब होने लगा है । इस प्रस्तुति के लिए सन्धु जी बधाई की पात्र हैं । सम्पादक मण्डल तो बधाई के हक़दार हैं ही ....रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'


हरदीप







6 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावों का समागम किया है और एक शब्द मे ही सारे भावों को समेट दिया है…………वाह

kshama said...

Behtareen!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति ... अनुभूति पर भी पढ़ा था ॥

Udan Tashtari said...

Ek naya shabd bhi jana sunder haiku rachnao ke sath.

रविकर said...

शुक्रवारीय चर्चा मंच पर आपका स्वागत
कर रही है आपकी रचना ||

charchamanch.blogspot.com

Dr.Bhawna said...

Bahut-Bahut badhai...