Followers- From 17 May 2010.....'til today

Saturday, March 24, 2012

कुछ न माँगूँ (हाइकु)


1
 कुछ न माँगूँ        
बस पल दो पल
ख़ुशी के सिवा
2.
कभी ढूँढ़ती
यादों के आँगन में
ख़ुशी अपनी
3
बिन बुलाए,
ये गम पता नहीं
क्यों चले आए !
4 .
मैं हूँ पगली 
ढूंढने चली ख़ुशी 
यूँ गली-गली 
5 .
ख़ुशी तो बैठी 
कहीं दुबक कर 
मेरे दिल में 
6 .
ओ मेरी ख़ुशी 
तुझे काहे का डर
तू बाहर आ 
7 .
गमों की रात
जब करती कब्जा
वो पल रूठा 
8 .
गम के गीत 
एक अकेला मन
कैसे हो जीत
9 .
दिल ज्यों गाए
प्रीत-मधुर गीत 
तभी हो जीत 
10 .
गम का साया 
खुशियों की धूप में 
टिक न पाया 

--डॉ. हरदीप कौर सन्धु



8 comments:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन...अच्छे लगे!

udaya veer singh said...

शुभकामनायें/ सुन्दर प्रेरक भाव में रचना बधाईयाँ जी

रविकर said...

खूबसूरत

kshama said...

Bahut,bahut sundar!

Kailash Sharma said...

बेहतरीन हाइकु...

सहज साहित्य said...

दर्द का हद से गुज़रना है दवा होना , पुरानी पंक्ति है । हरदीप जी ने-
गम का साया
खुशियों की धूप में
टिक न पाया
-कहकर हर आहत मन के घाव पर मरहम लगाया है । आपका हर हाइकु सुख -दु:ख के सांसारिक सत्य को समझाता है । सपाटबयानी वाले सैंकड़ों हाइकु रोज लिखे जा रहे हैं । आपने अपने ब्लॉग और हिन्दी हाइकु के माध्यम से इस विधा को गौरव प्रदान किया है । हार्दिक बधाई !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Reena Maurya said...

बहुत ही बढ़िया सभी बेहतरीन है.....