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Thursday, July 11, 2013

पटना में हुई गोष्ठी की रिपोर्ट

Sunday, June 23, 2013

ढूँढ़े साहिल

अपनापन कई बार शब्दों की पहुँच से परे हो जाता है, तो चुप्पी में बदल जाता है । अपने दर्द की खुद को जब  आदत- सी हो जाती  है तो लगता है इसको यहीं छुपा लो ,बिखर गया तो ज्यादा टीस देगा । इसी विषय पर आज हाइकु का गुलदस्ता ,आप सबकी भेंट

1
हाथों से मिटी 
खुशियों की लकीरें 
बिखरा दर्द । 
2
मेरी तन्हाई 
मेरे साथ चलती 
ढूँढ़े साहिल । 
3
छोड़ वजूद 
रेत पर लकीरें 
लौटी लहरें । 
4
शान्त सागर 
बेचैन- सी लहरें 
जख़्मी साहिल । 

5 .
गूंगे हैं शब्द
चीखों के बीच चुप्पी 
शोर पे भारी । 
 
6  .
चुप्पी के बीच 
एक चीख है छुपी 
बहरे कान । 
 
7  .
सन्नाटा छाया 
बाहर से भीतर 
डरता मन । 
 
 
8 .
चीर निकला 
जिस्म का पोर -पोर 
सर्द सन्नाटा । 
 
9 .
सलीब टंगी 
असहाय ख़ामोशी 
मुर्दा सन्नाटा । 




 डॉ हरदीप सन्धु
 

Saturday, May 18, 2013

शुभकामनाएँ !


1-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु’
मन शीतल
नयन स्नेह-जल
सिन्धु अतल ।
2
महके सदा
जीवन उपवन
जैसे चन्दन ।
-0-
2-भावना सक्सैना
1.
मिले आकाश
सार्थक हो जीवन
अभिनंदन।
2.
स्नेह की वर्षा
आशीर्वाद का घेरा
सदा हो तेरा।
3.
जियो जीवन
स्वस्थ मधुरतम
करें कामना।
4
निभाएँ मीत
मुस्कानों की सौगात
सदा हों साथ । 
-0-
3-डॉ सरस्वती माथुर   
ताँका
1
फूल कलियाँ
भेज रही हूँ तुम्हें
जन्मदिन पे
शुभकामना -संग
सखी होके  मगन
2
बधाई सखी
बुनो सुख सपने
उल्लास भर
मन वसुंधरा भी
महक- खिल उठे !
3
शुभ बेला  है
जन्मदिन पे आज
हमे है नाज़
हाइकु - बगिया की
आप हैं सरताज ।
4
आपने दिया
हाइकु का आँगन
चहकती- सी
डोलती है जिसमें
शब्दों की तितलियाँ
डॉ सरस्वती माथुर
-0-
4-ज्योतिर्मयी पन्त
1
शुभकामना
पूरी हर कामना
ख़ुशी आँगना
-0-
5-मंजू गुप्ता
1
ताल तलैया
उत्सव है मनाएँ
नाचे औ गाएँ ।
2
भोर गोद में
झूमी दीवानी हवा
दुआएँ दे के ।
3
जेठ का चाँद
ले आया वर्षगाँठ
झूमा संसार ।
4
जिक्र में आप
हमारे शहर में
महकी धरा ।
5
महफिल में
रंगीन शाम ढली
हाइकु सजे ।
-0-
6-हरकीरत 'हीर'
1
हर की दीप
उतरी धरती पे
ज्यूँ मोती सीप
2
धरा मुस्काई
आसमान चहका
जब तू आई
3
जन्मदिन की
शुभकामनाएँ ,
दुआ उम्रों की।
-0-

Thursday, April 25, 2013

संरचना में मेरी लघुकथाएँ


                                                  रब की फोटो
                  
एक बच्चा अपनी चित्रकला की अभ्यास पुस्तक में कोई चित्र बना रहा था । अध्यापक ने पुछा, " बेटा आपका बनाया चित्र तो बहुत खूबसूरत है । मगर आप बना क्या रहे हो ?" 
         "मैं रब की फोटो बना रहा हूँ।" बच्चे ने सहजता से उत्तर दिया । 
         "रब को तो किसी ने नहीं देखा। कोई नहीं जानता कि रब दिखता कैसा है?" अध्यापक बोला ।
       "जब मैंने यह चित्र बना लिया लोग जान जाएँगे ।" इतना कहकर बच्चा फिर अपना चित्र बनाने में व्यस्त हो गया ।

                                      खूबसूरत हाथ 
एक दिन अध्यापक ने दूसरी कक्षा के बच्चों को उनकी सबसे अधिक प्यारी सी किसी वस्तु का चित्र बनाने के लिए कहा । किसी ने सुंदर फूल बनाया तो किसी ने रंग - बिरंगी तितलियाँ । कोई सूर्य, चाँद , सिराते बनाने लगा तो कोई अपना सुंदर खिलौना । कक्षा के एक कोने में बैठी करमो ने बदसूरत से दो हाथ बनाए । अध्यापक ने हैरान होकर पूछा, ''ये क्या बनाया ? हाथ ! किसके हाथ हैं ये ?"
"ये दुनिया के सबसे खूबसूरत हाथ हैं , मेरी माँ के हाथ हैं ये।"
"तुम्हारी माँ क्या करती है ?"
"वह मज़दूरिन है । दिन भर सड़क पर पत्थर तोड़ने का काम करती है" करमो ने सिकुड़ते हुए उत्तर दिया । 
                      
                                             **************                      
                                               
खुबसुरत हाथ लघुकथा .com के फरवरी 2013 अंक में भी प्रकाशित हुई । देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिएगा 

Wednesday, April 24, 2013

भोर की बेला


1.

सुहानी भोर 
सागर की लहरें 
मचाएँ शोर  
2.
भोर की बेला 
चीं -चीं गाए चिड़िया 
मन अकेला  
3.
भोर किरण 
सिन्दूरी आसमान 
मंद पवन  ।
4.
हँसा सवेरा 
खिड़की से झाँकती 
स्वर्ण रश्मियाँ । 
5.
धीमी पवन 
पँखुरी भरे आहें 
खुशबू मन  ।

डॉ हरदीप सन्धु 
नोट : मेरे ये हाइकु सहज साहित्य पर 21 अप्रैल 2013 को प्रकाशित हुए देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिएगा । 

Thursday, March 21, 2013

फ्रेम अधूरा


1.
frame-1खाली है फ्रेम 
दीवार पे लटके 
सूना है घर ।
2 .
अपूर्ण फ्रेम 
काँपते हाथों टँगे 
चुप्पी है छाई ।
3 .
 फ्रेम अधूरा
खोई एक तस्वीर 
धूल है जमी ।
4 .
frame-2मौन हैं सब 
खाली फ्रेम बोलता 
दिल डोलता ।
5 .
खाली है फ्रेम 
अँखियाँ  ढूँढ़ रही 
भावी चेहरा  ।

डॉ हरदीप  सन्धु

Sunday, March 17, 2013

राह कँटीली


1.
नहीं रुकेंगे 
जब तक है दम 
उड़े चलेंगे 

2.
राह कँटीली 
चरण चुभे शूल 
बनेंगे फूल 

3.
साँझा आँगन 
शब्दों के मोती चुन 
सजाएँ हम 


डॉ हरदीप सन्धु 

Wednesday, March 13, 2013

कुछ हाइकु

 

1
नेह -अमृत          
अँजुरी भर, देखा
अक्स तुम्हारा
2
लबों पे चुप्पी
बोल रही अखियाँ
ढूँढ़े किनारा
3
मौन में मन
रोंआँ  -रोंआँ  नहाया
मीत को पाया
डॉ हरदीप कौर सन्धु