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Wednesday, March 13, 2013

कुछ हाइकु

 

1
नेह -अमृत          
अँजुरी भर, देखा
अक्स तुम्हारा
2
लबों पे चुप्पी
बोल रही अखियाँ
ढूँढ़े किनारा
3
मौन में मन
रोंआँ  -रोंआँ  नहाया
मीत को पाया
डॉ हरदीप कौर सन्धु  

3 comments:

सहज साहित्य said...

प्रत्येक हाइकु मन की गहराई तक अभिभूत कर गया ।इस तरह के हाइकु हिन्दी काव्य-जगत का वैभव हैं ।
1
नेह हो अमृत जैसा और फिर उसमें जो अक्स देखा जाएगा वह भी निर्मल और उज्ज्वल होगा।
2
[ लबों की चुप्पी सब कुछ कह देती है कि दिल में कितना गहरा समन्दर अँगड़ाई ले रहा है ।ऐसे में किनारा तलाश करना ही होगा, क्योंकि किनारे तो पहले ही नेह में लीन हो चुके हैं।
3
मीत के मिलने की खुशी में रोम -रोम का आह्लाद से नहाना , बहुत अर्थपूर्ण है।
-बहुत बधाई!

दिलबाग विर्क said...

यह प्रविष्टि कल के चर्चा मंच पर है
धन्यवाद

Aziz Jaunpuri said...

मन की गहराई तक नहाई अर्थपूर्ण हाइकु