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Sunday, March 17, 2013

राह कँटीली


1.
नहीं रुकेंगे 
जब तक है दम 
उड़े चलेंगे 

2.
राह कँटीली 
चरण चुभे शूल 
बनेंगे फूल 

3.
साँझा आँगन 
शब्दों के मोती चुन 
सजाएँ हम 


डॉ हरदीप सन्धु 

3 comments:

सहज साहित्य said...

नहीं रुकेंगे
जब तक है दम
उड़े चलेंगे

2.
राह कँटीली
चरण चुभे शूल
बनेंगे फूल
आपके दोनो हाइकु आशा की ज्योति जगाने वाले हैं , काँटों भरी राह में फूल खिलाने की उम्मीद से भरे हैं । शब्दों का उजाला फिर से नियमित हो रहा है , यह मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी है । यही कहूँगा-आती बाधाएँ / कदम जो बढ़ाएँ / चाँद छू आएँ।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह!
आपकी यह प्रविष्टि आज दिनांक 18-03-2013 को सोमवारीय चर्चा : चर्चामंच-1187 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सार्थक हाइकू,आभार.