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Thursday, April 25, 2013

संरचना में मेरी लघुकथाएँ


                                                  रब की फोटो
                  
एक बच्चा अपनी चित्रकला की अभ्यास पुस्तक में कोई चित्र बना रहा था । अध्यापक ने पुछा, " बेटा आपका बनाया चित्र तो बहुत खूबसूरत है । मगर आप बना क्या रहे हो ?" 
         "मैं रब की फोटो बना रहा हूँ।" बच्चे ने सहजता से उत्तर दिया । 
         "रब को तो किसी ने नहीं देखा। कोई नहीं जानता कि रब दिखता कैसा है?" अध्यापक बोला ।
       "जब मैंने यह चित्र बना लिया लोग जान जाएँगे ।" इतना कहकर बच्चा फिर अपना चित्र बनाने में व्यस्त हो गया ।

                                      खूबसूरत हाथ 
एक दिन अध्यापक ने दूसरी कक्षा के बच्चों को उनकी सबसे अधिक प्यारी सी किसी वस्तु का चित्र बनाने के लिए कहा । किसी ने सुंदर फूल बनाया तो किसी ने रंग - बिरंगी तितलियाँ । कोई सूर्य, चाँद , सिराते बनाने लगा तो कोई अपना सुंदर खिलौना । कक्षा के एक कोने में बैठी करमो ने बदसूरत से दो हाथ बनाए । अध्यापक ने हैरान होकर पूछा, ''ये क्या बनाया ? हाथ ! किसके हाथ हैं ये ?"
"ये दुनिया के सबसे खूबसूरत हाथ हैं , मेरी माँ के हाथ हैं ये।"
"तुम्हारी माँ क्या करती है ?"
"वह मज़दूरिन है । दिन भर सड़क पर पत्थर तोड़ने का काम करती है" करमो ने सिकुड़ते हुए उत्तर दिया । 
                      
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खुबसुरत हाथ लघुकथा .com के फरवरी 2013 अंक में भी प्रकाशित हुई । देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिएगा 

Wednesday, April 24, 2013

भोर की बेला


1.

सुहानी भोर 
सागर की लहरें 
मचाएँ शोर  
2.
भोर की बेला 
चीं -चीं गाए चिड़िया 
मन अकेला  
3.
भोर किरण 
सिन्दूरी आसमान 
मंद पवन  ।
4.
हँसा सवेरा 
खिड़की से झाँकती 
स्वर्ण रश्मियाँ । 
5.
धीमी पवन 
पँखुरी भरे आहें 
खुशबू मन  ।

डॉ हरदीप सन्धु 
नोट : मेरे ये हाइकु सहज साहित्य पर 21 अप्रैल 2013 को प्रकाशित हुए देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिएगा ।