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Wednesday, May 14, 2014

शगुन


          छिंदा जब भर जवान हुआ तो उसकी शादी का भागों वाला दिन आ गया। उसके विवाह के सभी शगुन उसकी माँ ने अपनी जेठानी दलीपो से ही करवाए। छिंदे की शादी के बाद दलीपो कुछ उदास सी रहने लगी। ऐसा लगता था कि जैसे कोई अनदेखा डर उसे अंदर से खाए जा रहा था। इसी तरह कई वर्ष बीत गए। उसे वह दिन याद आ गया जब नि:सन्तान दलीपो की झोली में उसके देवर ने अपने पहले बेटे को डालते हुए कहा, " भाभी आज से छिंदे को तू अपना पुत्र ही मान ले, यह अब तेरा ही है।" नम आँखों से छिंदे को आँचल लेते हुए दलीपो को लगा जैसे उसकी छातियों में भी दूध उतर आया हो। अब छिंदा भी अपनी ताई को बहुत प्यार करता और उसको बड़ी माँ से बुलाता।
           चार बरस के बाद जब छिंदे के घर में पहली बेटी ने जन्म लिया तो दलीपो की ख़ुशी संभाले नहीं संभलती थी।  वह ख़ुशी में इधर -उधर घर में घूम रही थी। दलीपो देसी घी के लड्डू पूरे गाँव में बाँटते हुए सभी को कह रही थी , " अरी बहनोंमुझे तो कब का इस दिन का इंतज़ार थालड़का हो या लड़की, मेरे लिए कोई अंतर नहीं है ये तो रब की देन होते हैं - दोनों एक समान। अरी सबसे बड़ी बात तो ये है कि हमारे घर में लीक तो चली नहीं तो छिंदे की माँ ने मन ही मन मुझे कोसना था कि इस अभागन दलीपो के हाथों छिंदे के विवाह के शगुन हुए थे तभी तो इसके कोई औलाद नहीं हुई।'' 
डॉ. हरदीप कौर सन्धु 

4 comments:

सहज साहित्य said...

लगभग 10 महीने बाद शब्दों का उजाला फिर शुरू हुआ , इसके लिए बधाई और आम ज़िन्दगी के विषय पर लिखी बहुत सार्थक और सकारात्मक सोच की लघुकथा पढ़ने का अवसर मिला , यह और भी महत्त्वपूर्ण है। अब आप यह उजाला जारी रखिएगा । इतनी लम्बी चुप्पी से परहेज़ कीजिएगा हरदीप जी

jyotsana pardeep said...

andhvishvason ko todti v ladka ,ladki mein bhedbhaav mitati..sundar
kahaani....

jyotsana pardeep said...

andhvishvaason ko todti v ladke,ladki me samaanta ka sandesh deti sundar kahaani.....hardeep ji ko badhai

IQBAL BHULLAR said...

Nice line sister